लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रमोशन की आस लिए बैठे आईटीआई के करीब 5 लाख छात्र छात्राओं को बड़ा झटका लगा है. कंफीडरेशन ऑफ प्राइवेट आइटीआइ एसोसिएशंस ऑफ इंडिया की ओर से रखे गए प्रमोशन के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया है. ऐसे में आगामी जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं के ऑफलाइन कराए जाने की आशंका जताई जा रही है.
सीबीएसई की तरह परीक्षा टालने की थी मांग
कंफीडरेशन ऑफ प्राइवेट आईटीआई एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष उमेश मिश्रा व कोषाध्यक्ष डा.एपी सिंह की मौजूदगी में छात्रों को प्रमोट करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था. यह प्रस्ताव 24 अप्रैल को महानिदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन भारत सरकार को भेजा गया. इसमें आईटीआई के छात्रों को सीबीएसई और आईसीएसई की तरह प्रमोट किए जाने की मांग उठाई गई थी. महासचिव डीके द्विवेदी ने बताया कि 18 मई को महानिदेशक की ओर से परीक्षा कराने का पत्र आने के बाद अब पढ़ाई शुरू हो गई है.
प्रमोशन के कोई दिशा-निर्देश नहीं आए
व्यावसायिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक एससी तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के महानिदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन की ओर से प्रमोट करने की कोई गाइड लाइन नहीं आई है. जुलाई में परीक्षा प्रस्तावित है. प्रथम व द्वितीय वर्ष मिलाकर करीब पांच लाख विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे.
ऑनलाइन क्लासेस में सामने आई परेशानियां
स्कूलों की तरह ही आईटीआई में भी ऑनलाइन क्लासेस की शुरुआत की जा चुकी है. हालांकि इसको लेकर छात्रों की तरफ से लगातार शिकायतें भी सामने आ रही है. जिम्मेदारों की माने तो आईटीआई जैसे संस्थानों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे दूरदराज और गांव के इलाकों से हैं. उनके लिए ऑनलाइन क्लासेस के लिए आवश्यक स्मार्टफोन हाई स्पीड इंटरनेट जैसी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में छात्रों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

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