मिर्जापुर: तीन दिवसीय मंडलीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मिर्जापुर पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विंध्याचल धाम में विधिवत दर्शन-पूजन किया, लेकिन कंतित दरगाह के बगल से निकल गए. उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाना जरूरी नहीं समझा, जबकि मजार पर दो दिन से तमाम प्रशंसक बुके, फूल और चादर के साथ उनका इंतजार कर रहे थे.
‘एक सीट नहीं जीत पाएंगे अखिलेश’
अखिलेश यादव के हजरत ख्वाजा इस्माइल चिश्ती रहमतुल्ला अलैह के दरगाह पर नहीं जाने पर मुजावर समेत तमाम लोगों ने इसे दुर्भाग्य बताया. कहा कि हम लोगों का दुर्भाग्य नहीं है कि वह यहां नहीं आये, दुर्भाग्य उनका है जो कंतित शरीफ जैसे पवित्र दरगाह पर मत्था टेकने नहीं पहुंचे, जिले में कोई सीट नहीं जीत पाएंगे.
फूल और बुके लेकर लोग कर रहे थे इंतजार
दरगाह पर अखिलेश यादव की तैयारी में फूल, बुके, दरगाह पर चढ़ाने के लिए चादर रखकर स्थानीय लोग सपा सुप्रीमो का इंतजार कर रहे थे. बकायदा दरगाह को इस दौरान सजाया भी गया था, लेकिन अखिलेश यादव दरगाह पर नहीं पहुंचे. उनके दरगाह पर नहीं पहुचने से मुस्लिम समाज के लोग निराश दिखे. क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि मंदिर के बाद दरगाह पर चादर पोशी करना कोई नेता नहीं भूलता. इससे पहले कांग्रेस पार्टी से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी यहां आ चुके हैं.
एक बार कंतित दरगाह जा चुके हैं सपा सुप्रीमो
दो दिवसीय दौरे के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मां विन्ध्वासिनी और अड़गड़ानंद महाराज का दर्शन कर 2022 में सरकार बनाने का आर्शीवाद लिया. कंतित शरीफ पर नहीं पहुंचने पर स्थानीय अख्तर ने तंज कसते हुए कहा कि हम लोगों का दुर्भाग्य नहीं है कि वह यहां नहीं आये. दुर्भाग्य उनका है जो कंतित शरीफ जैसे पवित्र दरगाह पर मत्था टेकने नहीं पहुचे. उन्होंने बताया कि यहां पर इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव के परिवार और खुद अखिलेश यादव ने 1999 में माथा टेक चुके हैं. अख्तर ने कहा कि मिर्जापुर जिले में बहुत मुश्किल है कि उनके पार्टी का कोई सीट जीत पाए.
शायद हिंदुत्व की राह पर विगुल फूंकेंगे अखिलेश
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मिर्जापुर में कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये थे. इस दौरान अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए मंत्र दिया. वह इस दौरान कई कार्यकर्ताओं के घर भी गए. इसी बीच जगह-जगह चर्चा का विषय यह भी बना है कि अखिलेश यादव मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने गए लेकिन कंतित शरीफ पवित्र दरगाह पर नहीं गए. लोगों का यह भी कहना है कि लग रहा है अखिलेश यादव इस बार हिंदुत्व की राह पर आगामी विधानसभा चुनाव का बिगुल फूकेंगे.

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