सीतापुर – पराली, गन्ने की पत्ती अथवा अन्य किसी भी प्रकार का फसल अवशेष खेतों में जलाना दंडनीय अपराध है। इससे न केवल वायु प्रदूषण फैलता है बल्कि मिट्टी में उपस्थित लाभकारी पदार्थ भी नष्ट होते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। यह जानकारी जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली द्वारा पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए खेतों में फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

जिसमे पुलिस कार्यवाही के अंतर्गत एफआईआर एवं गिरफ्तारी के भी प्राविधान हैं। कृषि भूमि क्षेत्र 2 एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदंड रु 2500 प्रति घटना, 2 एकड़ से अधिक और 05 एकड़ तक होने की दशा में अर्थदंड 5000 रु प्रति घटना एवं 5 एकड़ से अधिक होने की दशा में अर्थदंड 15000 रु प्रति घटना वसूल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त खेतो में अवशेष जलाने लगातार 2 घटनाएं होने की दशा में सम्बंधित कृषकों को सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान से वंचित किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रदेश में फसलों की कटाई कम्बाइन हार्वेस्टिंग स्ट्रारीपर विद बाइंडर अथवा स्ट्रारीपर का प्रयोग अनिवार्य कर दिया है। बिना रीपर मशीन के कम्बाइन प्रयोग करने वाले मालिकों विरुद्ध सिविल दायित्व निर्धारित किये जायेगे। उन्होंने किसान भाइयों अनुरोध किया है कि फसल अवशेष कदापि न जलाएं बल्कि उन्हें खेत में पलटकर बल्कि उन्हें खेत में पलटकर खाद बनायें। प्रत्येक विकास खण्ड में फसल अवशेष को मिटटी में मिलाने के लिए कृषि यंत्र जैसे–मल्चर, पैडी स्ट्रा चापर किराये पर उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि जनपद में फसल अवशिष्ट जलाये जाने से रोकने हेतु कड़े दिशानिर्देश निर्गत किये गए हैं एवं प्रभावी कार्यवाहिया की जा रहीं हैं। जनपद स्तर पर अपर जिलाधिकारी एवं तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारियों के नेतृत्व में समस्त सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों की सेल/टीम गठित कर प्रभावी अनुश्रवण एवं क्रियान्वयन तथा घटना होने पर उत्तरदायित्व निर्धारण की कार्यवाही की जा रही हैं। विगत दिवसों में 19 किसानों एवं 14 कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाहीं की गयी हैं तथा 47500 रु जुर्माने के रूप में वसूला गया है।

फसल अवशिष्ट जलाये जाने से होने वाले वायु प्रदूषण एवं उक्त हेतु प्राविधानित दण्ड के सम्बन्ध में जनपद मुख्यालय, तहसील, विकास खण्ड एवं थाना स्तर पर फ्लेक्स के माध्यम से जागरूकता प्रसारित की की जा रही है। रबी फसल में होने वाली जनपद एवं विकास खण्ड एवं ग्राम स्तरीय गोष्ठीयों एवं किसान पाठशालाओं में फसल अवशिष्ट न जलाये जाने के सम्बन्ध में कृषकों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। कृषकों को अनुदान के रूप में उपलब्ध कराये गये 40 मल्चर, 30 पैडी स्ट्राचापर के प्रयोग से पराली एवं गन्ने की पत्तियों को जोत कर खाद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि पेराई सत्र 2019-20 पौध की कटाई के उपरान्त सूखी पत्ती को न जलाकार उसे पूरे खेत मे फैलाकर नमी संरक्षण हेतु कृषकों को जागरूक किये जाने हेतु गन्ना विभाग द्वारा 10,000 पम्पलेट का वितरित किये जा रहें एवं समस्त समितियों पर फ्लेक्स एवं एम0 किसान पोर्टल के माध्यम से 27,500 कृषकों को संदेश भी भेजा गया है। नगरीय क्षेत्रों में अधिशाषी अधिकारियों को कूड़ा जलाये जाने की घटनाओं के लिए पूर्ण उत्तरदायी बनाया गया है। जनपद के सभी 19 विकास खण्डों की समस्त ग्राम सभाओं में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता एवं राजस्व, कृषि तथा पुलिस प्रतिनिधियों की उपस्थिति में बैठक कर जागरूकता एवं प्राविधानित दण्ड से अवगत कराया जा रहा है।

इसके साथ ही राजस्व, कृषि, विकास, गन्ना एवं पुलिस के समस्त फील्ड स्तरीय अधिकारियों/कर्मचारियों को समूह बनाकर क्षेत्रों में भ्रमण कर प्रत्येक दशा में घटनाओं पर अंकुश लगाया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी पत्रकार बंधुओं से अनुरोध किया कि मीडिया के माध्यम से इस विषय का व्यापक प्रचार प्रसार एवं जनजागरूकता प्रसारित किये जाने में सहयोग प्रदान करें।

रिपोर्ट – नन्द किशोर नाग

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