बचपन के दोस्त हैं काम्बली व सचिन

Young_age_Sachin_and_Vinod_Kambliमुम्बई के क्रिकेट प्रेमियों को वह दिन आज भी अच्छी तरह से याद है जब दो स्कूली लडक़ों ने आजाद मैदान पर वो करिश्मा कर दिखाया जो आज भी किसी स्कूली लडक़ों के लिए सपना हुआ करता है। 1988 में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में सचिन के स्कूल शारदाश्रम विद्यामंदिर का सामना सेंट जेवियर्स से था। टूर्नामेंट के इस सेमीफाइनल मुकाबले में उन पर पूरे स्कूल की उम्मीदें टिकी थीं। पहले दिन तेंदुलकर और काम्बली के बल्ले से रन गोली की रफ्तार से निकले। गेंदबाज चिल्लाने लगे। मैदान पर दौड़ते दौड़ते सेंट जेवियर्स स्कूल के लडक़े थे गए। मैच के दूसरे दिन कोई आने को तैयार न था। आखिरकार रमाकांत आचरेकर के अनुरोध पर शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल ने अपनी पारी 748 रन पर दो विकेट के स्कोर पर घोषित की थी। सचिन 326 और काम्बली 349 रन बनाकर नाबाद रहे थे। इन दोनों होनहार लडक़ोंं की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत शारदाश्रम ने 120 ओवरों में 748 रन का पहाड़ खड़ा किया था|

दो दोस्तों के साहसिक खेल का गवाह बना आजाद मैदान स्कूली लडक़ों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। 23 फरवरी 1988 के दिन हुए इस स्कूली मैच में रनों की बरसात की थी आज के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर व दूसरे बल्लेबाज थे विनोद काम्बली। विनोद काम्बली और सचिन जब पहली बार एक दूसरे मिले तब सचिन 10 वर्ष और काम्बली 11 वर्ष के थे। विनोद काम्बली जहां मुम्बई के भेंडी बाजार की एक चाल में रहते थे वहीं सचिन पूर्वी बान्द्रा एक मध्यमवर्गीय परिवार से सम्बंध रखते थे। सचिन की प्रतिभा को उनके बड़े भाई अजीत व पिता ने पहचान लिया था तभी उन्हें शारादाश्रम स्कूल में क्रिकेट के द्रोणाचार्य कहे जाने वाले रमाकांत आचरेकर के पास भेजा गया। इसी आश्रम में विनोद काम्बली भी थे। रमाकांत आचरेकर जब पचास होनहार क्रिकेटरों का सलेक्शन कर रहे थे तब उन्होंने सचिन को शामिल नहीं किया था। सचिन इस बात पर बहुत रोए खैर बड़े भाई अजीत के अनुनय विनय पर सचिन को एक मौका दिया गया। रमाकांत आचरेकर द्वारा चुने गए पचास लडक़ों में सचिन व काम्बले भी थे|

आजाद मैदान में सेंट जेवियर्स के साथ खेले गए मैच में स्कूली क्रिकेट के बाद एक बार दो दोस्तों की बेहतरीन पारी फिर देखने को मिली। विनोद काम्बली ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज सचिन के आने के तीन साल बाद 1991 में किया। पाकिस्तान के खिलाफ पहले मुकाबले में काम्बली को बल्लेेबाजी का अवसर नहीं मिल सका। दो साल बाद 1993 में काम्बली ने अपने बचपन के दोस्त सचिन के साथ एक बेहतरीन पार्टनरशिप निभाई। 18 जनवरी 1993 को जयपुर में इंग्लैंड के खिलाफ हुए वनडे में काम्बली और सचिन ने नाबाद 164 रन की साझेदारी की। काम्बली ने बेहतरीन शतक और तेंदुलकर ने शानदार अर्धशतक लगाया था। काम्बली जहां 100 रन बनाकर नाबाद रहे थे, वहीं सचिन 82 रन पर अविजित रहे थे। उस समय वो किसी भी भारतीय जोड़ी द्वारा बनाई तीसरी सबसे बड़ी वनडे पार्टनरशिप थी। आने वाले समय में जब भी क्रिकेट की यादगार पारियों की बात चलेगी तो इन दोस्तों की वह स्कूली पारी हमेशा यादगाार बनी रहेगी।

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