2014_9$largeimg208_Sep_2014_081003657हैदराबाद। एशियाई खेल या उसी समय होनेवाले डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट में से किसी एक में खेलने को लेकर असमंजस की स्थिति में फंसी सानिया मिर्जा ने दक्षिण कोरिया के इंचियोन में होनेवाले महाद्वीपीय खेल महाकुंभ में भाग लेने को लेकर आखिरी फैसला अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआइटीए) पर छोड़ दिया। सानिया यूएस ओपन मिश्रित युगल का खिताब जीतने के बाद रविवार को स्वदेश लौटीं और उनसे सोमदेव वर्मन और रोहन बोपन्ना के हटने के बाद एशियाई खेलों को लेकर बनी असंमजस की स्थिति के बारे में पूछा गया।
सानिया ने पत्रकारों से कहा, एशियाई खेलों को लेकर निश्चित तौर पर कुछ समस्याएं हैं, क्योंकि इसी समय एशिया में बीजिंग और तोक्यो में दो अन्य बड़े टूर्नामेंट खेले जाने हैं। मुझे इन दो सप्ताहों में कई अंकों का बचाव करना होगा, इसलिए यह काफी मुश्किल स्थिति है। उन्होंने कहा, लेकिन मैं इस पर फैसला करने का जिम्मा महासंघ पर छोड़ती हूं, क्योंकि मेरे लिए अभी फैसला करना बहुत मुश्किल है। सानिया ने कहा कि सर्किट को छोड़ कर खेलों को तरजीह देने से उनके लिए डब्ल्यूटीए के सत्र के चैंपियनशिप फाइनल में जगह बनाना मुश्किल हो जायेगा।
उन्होंने कहा, इसलिए अभी मेरे लिए फैसला करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे पास साल के आखिर में सिंगापुर में होनेवाली चैंपियनशिप में जगह बनाने का मौका है और यदि मैं इन दो टूर्नामेंटों में नहीं खेलती हूं, तो फिर चैंपियनशिप में जगह बनाना मुश्किल हो जायेगा। सानिया ने कहा, ह्यलेकिन तब भी यदि देश को मेरी जरूरत है, तो मैं एशियाई खेलों में खेलूंगी, लेकिन यह फैसला मैं खुद नहीं कर सकती। मैंने यह फैसला महासंघ पर छोड़ दिया है। वह एशियाई खेलों में टेनिस में भारत की पदक की उम्मीदों को लेकर भी आशंकित हैं। उन्होंने कहा कि बड़े खिलाड़ी पहले ही नाम वापस ले चुके हैं और ऐसे में उनकी मौजूदगी से ही पदक मिलना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, सभी बड़े स्टार नाम वापस ले चुके हैं, इसलिए मैं नहीं जानती कि मेरे खेलने से जीतने की कितनी संभावना है, लेकिन हम देखेंगे कि हम क्या कर सकते हैं।

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