लंदन ओलम्पिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली महिला मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम ने कहा कि वह रियो डि जनेरो में 2016 में होने वाले अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेंगे।
मैरीकॉम को उनकी लंदन ओलम्पिक की उपलब्धि के लिए जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने यहां एक समारोह में 10 लाख रूपए का चैक देकर सम्मानित किया। आदिवासी मामलों और पंचायती राज के केन्द्रीय मंत्री वी किशोर चन्द्र देव ने मणिपुर की मैरीकॉम को यह चैक प्रदान किया।
इससे पहले मैरीकॉम का लंदन से स्वदेश पहुंचने पर इंदिरा गांधी अन्तरराट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत हुआ। मैरीकॉम के साथ उनके पति ओनलर कॉम और मां अखम कॉम भी थीं। सैकडों की संख्या में प्रशंसक (मणिपुर की बेटी) का स्वागत करने के लिए मौजूद थे।
हवाई अड्डे पर मिले स्वागत और जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सम्मान समारोह से अभिभूत नजर आ रही मैरीकॉम ने कहा कि मैं रियो में अगले ओलंपिक में भी खेलूंगी और स्वर्ण पदक भी जीतूंगी।
मैरीकोम ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मुझे पूरे देशवासियों का समर्थन और प्यार मिला था। मुझे पूरा विश्वास था कि मैं ओलम्पिक में देश के लिए पदक जीत सकूंगी। हालांकि मुझे थोड़ा अफसोस भी है फिर भी मैं देश को बड़ा पदक देना चाहती थी। मैं यह सपना पूरा नहीं कर पाई लेकिन ओलंपिक में पदक जीतने का सपना मैंने जरूर पूरा कर लिया।
मणिपुर की मैरीकॉम ने कहा कि रियो में होने वाले अगले ओलम्पिक के लिए अभी से तैयारी शुरु कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि अगले ओलम्पिक में महिलाओं में वर्गों की संख्या तीन से बढ़ाकर छह कर दी जाएगी जिससे हमारे पास कई पदक जीतने क मौका रहेगा। यदि मेरा पुराना 48 किग्रा का वर्ग शुरु किया जाता है तो मैं उसमें लौट सकती हूं।

पांच बार की विश्व चैंपियन मैरीकॉम को इस बात का भी अफसोस था कि सात पुरुष मुक्केबाजों में से कोई भी पदक जीत नहीं सका। उन्होंने कहा कि पिछली बार कांस्य आया था और इस बार उम्मीद थी कि दो-तीन मेडल जरूर आएंगे लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि पुरुषों में कोई पदक नहीं आ पाया।

ओलम्पिक मुक्केबाजी स्कोरिंग सिस्टम की आलोचना करते हुए मैरीकॉम ने कहा कि यह सिस्टम बहुत ही खराब था। काफी विरोध हुए, कुछ फैसले बदले गए और केवल हमारे मुक्केबाज ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के मुक्केबाज भी इससे प्रभावित हुए। ऐसा लग रहा था कि जजों के पास कोई अनुभव ही नहीं है।
सेमीफाइनल में ब्रिटिश मुक्केबाज निकोला एडम्स से मिली पराजय के बारे में पूछे जाने पर मैरीकॉम ने कहा कि उस समय घरेलू प्रशंसकों का दबाव इतना ज्यादा था कि मैं कुछ नर्वस हो गई थी। मैं उसे उसके घर में ही हराना चाहती थी। मैंने तीसरे और चौथे राउंड में वापसी करने की कोशिश की लेकिन पहले दो राउंड में अंकों का फासला ज्यादा हो गया। मुझे अच्छा नहीं लग रहा था कि मैं ब्रिटिश मुक्केबाज से हार गई।
अपने ओलम्पिक पदक को खास बताते हुए मैरीकॉम ने कहा कि यह पदक मेरे लिए विशेष है क्योंकि ओलंपिक में पदक जीतना आसान नहीं होता है। सबसे बड़ी बात यह थी कि मेरी सफलता के लिए देश में हर जाति, धर्म के लोगों ने प्रार्थनाएं की।
स्वागत से अभिभूत मैरीकॉम ने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि हवाई अड्डे पर मेरा ऐसा स्वागत होगा। इसलिए मैं सभी का धन्यवाद करना चाहती हूं। सम्मान समारोह में मैरीकॉम के कोच अनूप कुमार को जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री महादेव सिंह खंडेला ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। समारोह में मैरीकॉम को 2012 का जनजातीय पुरस्कार देने की घोषणा की गई और उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया गया।

मैरीकॉम ने साथ ही कहा कि वह अपने बेटों को कभी मुक्केबाज नहीं बनाना चाहेंगी क्योंकि वह एक मां हैं और अपने अपने बेटों को कोई चोट लगते नहीं देख सकती हैं। हालांकि वह जो भी करिअर चुनेंगे, उसे वह मंजूर करेंगी।

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