virender-sehwag-sachin-tendulkar-2008-10-20-8-33-0मैदान पर चौके छक्के जमाना और बात है पर जब बात राजनीति की हो तब अच्छो अच्छो के छक्के छूट जाते हैं। सचिन तेंदुलकर मोदी के सामने नहीं लडऩा वाहते और वीरेन्द सहवाग ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्हें दिल्ली की सीट पर हाथ आजमाने का मौका मिला था पर वह नहीं लड़ रहे। आईपीएल के मैच में व्यस्त रहने की बात कह कर वह चुनाव लडऩे पर कन्नी काट गए। कांग्रेस ने दरअसल इन दोनो खिलाडिय़ों को सिर आंखों पर बैठाया पर समय आने पर और कमजोर पड़ती कांग्रेस और मजबूत होती भाजपा को ध्यान पर रख कर चुप हो गए। सचिन तेंदुलकर तो मुम्बई इंडियन में व्यस्त हैं लेकिन मुम्बई इंडियन के मालिक मुकेश अम्बानी का ध्यान भी रखना है उन्हें। अम्बानी और मोदी के रिश्ते भी जगजाहिर हैं। तेंदुलकर अम्बानी को नाराज नहीं कर सकते इसलिए वह मोदी के खिलाफ नहीं लड़ेंगे। कुछ यहीं कारण सहवाग का ै कि वह अरुण जेटली को नाराज नहीं करना चाहते। जेटली जी ने दिल्ली कि‎केट संघ के सहारे कई बार सहवाग पर उपकार किए हैं।

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