पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने रविवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा. इस पत्र में सिद्धू ने कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के बारे में बताया, जिन्हें पंजाब सरकार को पूरा करना चाहिए. सिद्धू ने ये पत्र ऐसे समय पर लिखा है, जब उनकी राज्य के मुख्यमंत्री के चरणजीत सिंह चन्नी के साथ तकरार देखने को मिल रही है.
अपने पत्र में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने सोनिया गांधी से कांग्रेस के घोषणापत्र के लिए 13-सूत्रीय एजेंडा के साथ एक पंजाब मॉडल पेश करने के लिए भी समय मांगा. ये पत्र पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव के रेफरेंस में लिखा गया है. इससे पहले शुक्रवार को सिद्धू ने कहा था कि उनकी चिंताओं का समाधान कर दिया गया है और पार्टी ने कहा कि वह राज्य इकाई के प्रमुख के रूप में बने रहेंगे. यह घटनाक्रम सिद्धू के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद आया है.
इस वजह से सिद्धू और चन्नी के बीच हुआ विवाद
पंजाब के सीएम चरणजीत चन्नी और सिद्धू के बीच तनाव तब हुआ जब कांग्रेस हाईकमान, चन्नी और रावत ने सिद्धू को ध्यान में रखे बिना पंजाब के नए मंत्रिमंडल को अंतिम रूप दे दिया. सूत्र बताते हैं कि राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट में शामिल किए जाने से सिद्धू नाराज थे. उन्होंने यह भी शिकायत की कि सिद्धू के वफादारों में से केवल परगट सिंह को ही उनकी पसंद का पोर्टफोलियो मिला. सिद्धू ने कहा कि उन्हें कैबिनेट विस्तार में हाईकमान द्वारा दरकिनार कर दिया गया और अमरिंदर सिंह के वफादार ब्रह्म मोहिंद्रा को एक बड़ा पद दिया गया.
सिद्धू ने इकबाल प्रीत सिंह सहोता को डीजीपी और अमर प्रीत सिंह देओल को एजी के रूप में नियुक्त किए जाने का भी विरोध किया. लेकिन सीएम चन्नी ने साफ कर दिया है कि दोनों नियुक्तियों को रद्द नहीं किया जाएगा. तनातनी इतनी बढ़ गई कि सिद्धू चन्नी के बेटे की शादी में भी शामिल नहीं हुए. वहीं, गुस्साए नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख के रूप में इस्तीफा दे दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि वह पंजाब के भविष्य से समझौता नहीं कर सकते. इस तरह पंजाब एक बार फिर से राजनीतिक गतिरोध में फंस गया.

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