LUCKNOW, JUNE 21 (UNI):- Quami Ekta Dal (QED) leaders Afzal Ansari (L) along with Samajwadi Party General Secretary and Uttar Pradesh Minister Shivpal Singh Yadav during the merger of QED in SP in Lucknow on Tuesday. UNI PHOTO-139U

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव एक बार फिर से झटके का शिकार हो गये। गुरूवार 6 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी ने कौमी एकता दल से विलय कर लिया। माफिया व कौएद अध्यक्ष मुख्‍तार अंसारी की कौमी एकता दल के साथ पहले भी समाजवादी पार्टी में विलय हुआ था। लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विरोध के चलते दो दिन बाद ही टूट गया था। मुलायम सिंह के कहने पर आज दोनों पार्टीयों का विलय हो चुका है।

प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने कौएद अध्यक्ष अफजाल अंसारी के साथ इसकी घोषणा की थी। यह विलय सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की अनुमति से शिवपाल की राय पर हुआ था। हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कड़े विरोध के बाद 25 जून को पार्टी संसदीय बोर्ड ने इस विलय को रद्द कर दिया था। और कहा जा रहा था कि मुलायम सिंह और उनके भाई व पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह इस पक्ष में थे कि अफजल अंसारी की पार्टी को सपा में शामिल कर लिया जाए लेकिन इस फैसले से अखिलेश यादव बेहद नाराज थे।

प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि बर्खास्त मंत्री राजकिशोर सिंह की बगावत पर वह विचार कर रहे हैं। नेताजी और अखिलेश की सलाह से फैसला होगा। उन्हों स्पष्ट किया कि सभी फैसले अखिलेश और मुलायम सिंह की सलाह से हो रहे हैं। इस मौके पर हत्यारोपी अमनमणि त्रिपाठी को टिकट देने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि सारा की मां सीमा सिंह मुझसे नहीं मिली। अगर मुझसे मिलेंगी तो विचार किया जाएगा।
 
इससे पहले जब विलय हुआ था तब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि यह फैसला मैंने नहीं लिया था। मुझे मुख्यमंत्री की हैसियत से जिस प्लेटफार्म पर कहना होगा, मैं कहूंगा। मैंने कह दिया ना कि हमारी समाजवादी पार्टी में मुख्तार अंसारी नहीं होंगे। इसके बाद ही समाजवादी पार्टी में यह विलय को रद्द करने पर मजबूर हुई थी।

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