mayawati_650x400_71479292155विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और नोट बंदी का साफ़ साफ़ असर सपा और बसपा पर देखा जा सकता है. सतीश चंद्र मिश्र और गायत्री प्रजापति की अपार दौलत भी इन दिनों कोई काम नहीं आ रही. रथ और रैली ठप है संसद में इसका असर साफ़ साफ़ दिखा। राज्यसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सरकार ने 500/1000 रुपये के नोट पर पाबंदी तो लगा दी लेकिन गरीब मेहनतकश, मध्यमवर्ग के पास जो दिक्कतें आएंगी उस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जाएं तो आपको अहसास होगा कि आर्थिक आपातकाल आ गया है। केंद्र सरकार ने बिना तैयारी के बड़े नोटों पर पाबंदी लगा दी है। मायावती ने कहा, आज राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते तो अच्छा रहता।

राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने नोटबंदी की तुलना आपातकाल से करते हुए कहा लोग भिखारी बन गए। उन्होंने कहा कि अगर पैसे से चुनाव जीता जाता तो सत्ताधारी कभी नहीं हारते। इसलिए नोट बैन को चुनावों से जोड़ना गलत है। हां, लेकिन नोट बैन का फैसला सही समय पर नहीं लिया गया। फसलों की बुआई चल रही है, किसान खाद और बीज नहीं ले पा रहा। आलू बिक नहीं पा रहा. कोल्ड स्टोरेज में आलू सड़ रहे हैं। आपके इस कदम से घाटा हो गया। यही नहीं नोट बंदी से पहले ही 2000 के नोट ट्वीट किए गए। गोपनीयता टूटने से नोटबंदी की मंशा फेल हो गई। सुबह ही उन्होंने कहा था कि नोट बंदी पर मैं किसान के साथ खुद भुक्तभोगी हूं, 10 हजार बोरा आलू बर्बाद हो रहा है।

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