यूपी में कांग्रेस और समाजावदी पार्टी के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद गठबंधन के बारे में आखिरखार सहमति बन गई। गठबंधन के फॉर्मूले के तहत दोनों पार्टियां अखिलेश यादव के नेतृत्व में मिलकर उत्तर प्रदेश के सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जहां कांग्रेस को 105 सीटें दी गई हैं वहीं समाजवादी पार्टी ने अपनी झोली में 298 सीटें रखी हैं।

बता दें कि शुक्रवार को सीएम अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट्स की लिस्ट घोषित कर दी थी। जिसके बाद कांग्रेस में काफी गहमागहमी का माहौल था। क्योंकि उसे उम्मीद थी कि गठबंधन के तहत सीटों पर फैसला होने के बाद दोनों पार्टियां मिलकर ऐसी कोई घोषणा करेंगी। इसके बाद, एसपी लीडर किरणमय नंद ने कांफ्रेंस में कहा कि कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 80 सीटें दी जा सकती हैं। उसके बाद ये भी खबरें आईं कि अखिलेश कांग्रेस को 99 से ज्यादा सीटें देने के लिए राजी नहीं थे।

अखिलेश इस डील में शुरुआत से ही हावी नजर आए। गठबंधन की सुगबुगाहट आते ही कांग्रेस की सीएम फेस शीला दीक्षित ने अपनी दावेदारी छोड़ दी। वहीं, अखिलेश के सीटों के ऐलान के बावजूद कांग्रेस सार्वजनिक तौर पर यही कहती रही कि गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। एसपी नेता नरेश अग्रवाल ने यहां तक कह दिया था कि एसपी और कांग्रेस में गठबंधन की गुंजाइश करीब-करीब खत्म हो चुकी है। उन्होंने ऐसी स्थिति के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया था।

खबरों के मुताबिक, बाद में प्रियंका गांधी और बाद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस मामले में दखल दी। इस डील को साकार करने में प्रियंका की अहम भूमिका रही। शनिवार को ऐसी रिपोर्ट्स भी आई कि सीट शेयरिंग को लेकर अखिलेश के बदलते रुख से कांग्रेस नाराज है। कहा जा रहा है कि जब समाजवादी पार्टी में अंदरूनी घमासान मचा हुआ था उस समय अखिलेश ने कांग्रेस को 142 सीटों का ऑफर दिया था, लेकिन जब अखिलेश को चुनाव आयोग से साइकल सिंबल मिल गया तब वह कांग्रेस को 100 से ज्यादा सीट देने को राजी नहीं थे।

गौरतलब है कि 493 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा के लिए 7 चरणों में वोटिंग है। पहले चरण की वोटिंग 11 फरवरी है जबकि सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग 8 मार्च को है। वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 24 जनवरी है।

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