अखिलेश की सपा में सरेआम मां-बहन की गाली देने वाले पंडित सिंह, छात्रा से बलात्कार कर उसकी हत्या करवाने वाले आनंद सेन, पत्रकार को जिंदा जलाने वाले राममूर्ति वर्मा, खनन माफिया गायत्री प्रजापति व पूरे प्रदेश को कूड़़े के ढेर में बदलने वाले बेलगाम आजम खां  नवरत्नों की तरह चमक रहे हैं। बलात्कारी मनोज पारस जैसा नगीना पा अखिलेश फूले नहीं समा रहे हैं….। अखिलेश ने साबित कर दिया कि मुलायम के असली वारिस वही हैं। मुख्तार व अतीक के करीबी शिवपाल तो कहीं आस पास भी नहीं ठहरते।

अखिलेश यादव जो यह कहते थकते नहीं थे कि किसी भी गुंडे बलात्कारी को पार्टी में नहीं लेंगे। लेकिन अखिलेश ने वही सारे कुकर्म किए जो कभी बाप और चाचा करते थे। मनोज पारस वह नाम है जिसे अखिलेश हद से ज्यादा चाहते हैं। मनोज पारस को नगीना से टिकट दे कर साबित कर दिया है सपा जैसी थी वैसी रहेगी। पहले मुलायम की सपा थी अब अखिलेश की सपा है। मुख्तार अंसारी व अतीक अहमद का विरोध दिखावा था। कुछ दिन बाद अतीक भी अखिलेश के साथ खड़े होंगे। नगीना से मनोज पारस को टिकट देना बताता है कि अखिलेश सपा का चेहरा कभी नहीं बदलेंगे। मनोज पारस को मंत्रिमंडल से हटाना महज दिखावा था जबकि हकीकत यह है कि मनोज पर से रेप का केस भी अखिलेश सरकार में वापस करवाया और मनोज पारस को दुलराते हुए सरकारी खर्च पर उसे विदेश दौरे पर भी भेजा। बताते चलें कि वर्ष 2006 में मनोज पारस अपने ही गांव की महिला को राशन का कोटा दिलाने के नाम पर साथियों के साथ मिलकर गैंगरेप किया था। पीडि़त महिला ने लखनऊ आकर मनोज पारस को टिकट न देने की अखिलेश से अपील भी की थी लेकिन अखिलेश कहां सुनने वाले। मनोज जैसा नगीना उन्हें मिलेगा कहां….।

बस में सस्ता टिकट नहीं सुरक्षा भी तो दो
महिलाओं को बस में टिकट में छूट से पहले उनकी सुरक्षा पर ध्‍यान न गया। यमुना एक्‍सप्रेस वे पर बीते दिनों लखनऊ आ रही बस में महिलाओं व बच्‍चों के साथ जो हुआ उसमें आपकी पोल खुल गई। डायल 100 का तो अता पता तक नहीं। महिलाओं से रेप तो वैसे भी सपा की नजर में गुनाह है ही नहीं । रेप के आरोपी तो सब अखिलेश के बगलगीर हैं। रेप को लड़कों की मामूली गलती बताने वाले मुलायम सिंह यादव से अखिलेश कई हाथ आगे निकल गए हैं। आनंद सेन व मनोज जैसों को टिकट दे कर उन्‍होंने रेप को गलती मानने तक से मना कर दिया है। आजम खां कब क्‍या बोल दें वह खुद भी नहीं जानते। शिवपाल यादव जब पार्टी की मजबूती बता अपराधियों को लाते थे तब अखिलेश विरोध करते थे। लेकिन आज अखिलेश मुलायम व शिवपाल से कहीं आगे निकल गए। आनंद सेन यादव अखिलेश की आंखों के तारे हैं। छात्रा से बलात्‍कार अपहरण और हत्‍या के आरोप में जेल की हवा खा चुके आनंद सेन पर अखिलेश की खास कृपा रही है। उम्रकैद की सजा पाये आनंद सेन अखिलेश राज में ही सजा से बरी हो पाये हैं। पहले बसपा फिर सपा में आने वाले आनंद सेन का मामला नवम्‍बर 2007 में मुलायम सिंह सबसे पहले सदन में उठाया था और कार्रवाइ्र की मांग की थी लेकिन अब वहीं आनंद अखिलेश के दुलारे हैं। अमनमणि त्रिपाठी भी बहुत जल्‍द अखिलेश की गुड बुक में आने वाले हैं।

पीने का साफ पानी दे नहीं पाये दूध घी का कर रहे वादा

घोषणा पत्र में बच्‍चों को दूध व देशी घी की वादा करते हैं लेकिन उन्‍हें साफ पीने का पानी नहीं दिलवा पाये। पढ़ने के लिए मेज कुर्सी तक नहीं है बच्‍चों के पास। लाखों बच्‍चे आज भी टाट पट्टी पर बैठते हैं। कई स्‍कूल तो बिना भवन के खुले में ही चल रहे हैं। मिड डे मील के नाम पर मिलने वाले खाने से बच्‍चे बीमार होते हैं तो होते रहे लेकिन घी दूध का वादा तो कर दिया है। मिड डे मील आपके राज में बच्‍चों तक पहुंचता ही कब है। मास्‍टर और प्रधान बीच में ही चट कर जाते हैं।  अदालत ने प्राथमिक शिक्षा पर कई बार अखिलेश सरकार को फटकारा लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। मंत्री रामगोविन्‍द चौधरी ने अदालत के निर्देश के बाद सुधार की पहल करनी भी चाही तो अखिलेश ने उनका विभाग ही बदल दिया। ब्रम्हदत्त हत्याकांड का आरोपी विजय सिंह, NHRM घोटाले में जेल की हवा खा चुका मुकेश श्रीवास्तव, माफिया अभय सिंह को अखिलेश ने सिर आंखों पर बिठा कर साबित कर दिया कि मुलायम के सच्‍चे वारिस वहीं हैं। शिवपाल तो मुखौटा थे जो अब अखिलेश ने उतार फेंका है।

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