वर्ष 2012 में अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव ने पत्रकारों से चर्चा में कहा था कि वर्ष 2017 में सपा का मुकाबला भाजपा बसपा से नहीं खुद सपा से होगा…

टीम न्यूज नेटवर्क 24
मुलायम सिंह के बारे में कहा जाता हैं कि उन्हें जो करना है वह पहले से तय होता है। उनकी स्क्रिप्ट में कोई बदलाव नहीं होता। मुलायम छह महीने पहले से ही मन बना चुके थे सपा को सत्ता से बाहर रखना है। उन्हें विकास कार्य के बलबूते सत्ता में आने की उम्मीद कभी नहीं रही। उन्हें डर था कि अखिलेश की छवि को उनके भ्रष्टïाचारी मंत्री नुकसान पहुंचा सकते हैं। अखिलेश की छवि चमकाने के लिए मुलायम ने फैमिली ड्रामा खेला। इस ड्रामे ने दो महीने तक यूपी की जनता का खूब मनोरंजन किया। शिवपाल रामगोपाल अमर सिंह जैसे पात्र अपनी अपनी भूमिका निभाते रहे और अखिलेश अपनी। नाटक पर परदा गिरने से पहले मुलायम सिंह यादव ने समूची सपा एक रणनीति के तहत अखिलेश को सौंप दी हैं। शिवपाल को मुलायम सिंह सपा से खुरच-खुरच कर बाहर निकाल देने की जल्दी में हैं। साइकिल पर अखिलेश के लिए मुलायम हो चुके मुलायम ने शिवपाल के साथ लोकदल में जाने के जो संकेत दिए हैं वह अनायास ही नहीं हैं। शिवपाल यादव की रही सही कसर वह उन्हें लोकदल से चुनाव लड़वा कर पूरी कर देंगे यह तय है। इतना ही नहीं मुलायम सिंह वर्ष 2012 में सपा की सरकार बनने के कुछ महीने बाद पत्रकारों से चर्चा में कहा था कि वर्ष 2017 में सपा का मुकाबला न बसपा न भाजपा से होगा। सपा का मुकाबला सपा से ही होगा। सपा यानी अखिलेश के सामने मायावती नहीं शिवपाल होंगे। सोमवार का दिन प्रदेश की राजनीति के लिए अहम होगा कि किस तरह से राजनीति के एक चतुर खिलाड़ी ने बेटे के लिए अपनी जमा पूंजी पूरी पार्टी दांव पर लगा दी।

नरेश व राम गोपाल से अखिलेश को कोई खतरा नहीं
मुलायम सिंह जानते हैं कि नरेश अग्रवाल भाजपा में जाने को बेताब हैं और गृहमंत्री राजनाथ की बेटे सहित परिक्रमा शुरू कर दी है। वो ज्यादा देर किसी के साथ नहीं रहते या कहे मौका देख कर कूद जाते हैं। रामगोपाल यादव तो बेटे व बहू सहित यादव सिंह मामले में फंसे हैं इसलिए वह अखिलेश को चुनौती देने की स्थिति में नहीं होंगे।
अहमद हसन, रामगोविन्द चौधरी व नारद राय जैसे नेता मुलायम की मर्जी से ही अखिलेश के साथ हैं। सपा में जो कुछ भी हो रहा है और जो कुछ भी होगा सब मुलायम सिंह के अनुसार है। मुलायम सिंह ने खुद को मार्गदर्शक बता कर साबित कर दिया है कि अखिलेश ही सपा के बिग बॉस होंगे। मुलायम सिंह यादव अपने बेटे को राष्टï्रीय राजनीति में उतारना चाहते हैं। अखिलेश यादव भले ही अपने युवा जोश के सहारे कुर्सी के लिए कुलांचे मारे लेकिन अब सत्ता उनसे दूर हो गई है। मुलायम सिंह भी यही चाहते हैं। मुलायम सिंह यादव शिवपाल को पूरी तरह से सपा से बेदखल कर देना चाहते हैं।

एक तीर से दो शिकार
मुलायम सिंह जानते हैं कि शिवपाल यादव संगठन के नेता हैं और कार्यकर्ताओं पर अच्छी पकड़ है। उनके न रहने पर पार्टी पर कब्जा शिवपाल का ही रहेगा। इसलिए अखिलेश को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर पूरी की पूरी सपा सौंप दी है और शिवपाल को लगभग बेदखल कर दिया है। 1 जनवरी के दिल अखिलेश का राष्टï्रीय अध्यक्ष बनना पूरा प्लान था नेता जी का। मुलायम सिंह यादव अपनी दूसरी पत्नी साधना व प्रतीक को भी नाराज नहीं करना चाहते। प्रतीक तो बेशुमार दौलत के मालिक हैं ही उनकी पत्नी अपर्णा भी विधानसभा का टिकट मुलायम की कृपा से पा चुकी हैं। सत्ता से बाहर रहने पर मुलायम को जहां परिवार की कलह से छुटकारा मिलेगा वहीं यादव सिंह मामले में उन्हें ज्यादा उलझना नहीं पड़ेगा। अब सब कुछ सामने हैं। क्लाइमेक्स चल रहा है। अखिलेश को सपा सौंप देने के बाद कुछ और नजारे देखने को मिलेंगे।

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