बिना मंत्री बनें मुख्यमंत्री जो बन गए, मोहन सिंह ने निकाली भड़ास और कहा सपा के सब नेता दूध के धुले नही

Mulayam Singh Yadav and Akhilesh Yadav
Mulayam Singh Yadav and Akhilesh Yadav

अखिलेश यादव कभी मंत्री नहीं रहे और सीधे मुख्यमंत्री बने हैं, इस नाते उनमें अनुभव की कमी है और वे अनुभव से तेजी से सीख रहे हैं। यह बात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद मोहन सिंह ने एक समाचार चैनल पर अपने दिल की भड़ास निकाल डाली। हालांकि यही मोहन सिंह ने हैं जिन्होंने डीपी यादव को सपा आने से रोकने के लिए अखिलेश की तारीफ भी की थी।

मोहन सिंह ने यह भी कह डाला कि सपा में सभी नेता और मंत्री दूध के धुले हुए नहीं हैं पर सभी को एक साथ बाहर भी नहीं किया जा सकता। हां, समय के साथ खराब लोग खुद ब खुद बाहर होते चले जाएंगे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों को तुलनात्मक नजरिए से देखे जाने के सवाल पर श्री सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव में अभी राजनीतिक दबदबे की कमी है, जबकि मुलायम सिंह के पास अपना एक सियासी कद और दबदबा था।

मोहन सिंह ने यह कह कर चौंकाया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को मंत्री बनाने पर आपत्ति थी। उन्होंने दो टूक कहा कि अखिलेश यादव को राजा भैया को लेकर भारी आपत्ति थी लेकिन अंतत: उन्हें पार्टी की इच्छा के आगे नतमस्तक होना पड़ा। रघुराज प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश में कारागार मंत्री हैं। चैनल को दिए इंटरव्यू में सपा महासचिव ने माना कि अखिलेश सरकार ने पिछले दिनों जिस तरह से जल्दबाजी में फैसले लिए उससे सरकार की किरकिरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि विधायक निधि से विधायकों को कार खरीदने के लिए धन देने का मुख्यमंत्री का फैसला, पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को नागवार गुजरा था और उन्होंने खुद अखिलेश यादव को यह निर्णय वापस लेने की सलाह दी थी। मोहन सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ‘अभी गलती करो और सीखो’ की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मोहन सिंह और समाजवादी पार्टी में विवाद का रिश्ता पुराना रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में डीपी यादव को शामिल किए जाने को लेकर मचे घमासान का ठिकरा भी पार्टी के प्रवक्ता रहे मोहन सिंह के सिर ही फोड़ा गया था। अखिलेश के खिलाफ दिए गए विवादास्पद बयान के कारण पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने यह फैसला किया था। पार्टी आला कमान ने मोहन सिंह को प्रवक्ता पद से हटा दिया था और रामगोपाल यादव को सपा का प्रवक्ता बनाया गया था। गौरतलब है कि मोहन सिंह ने डीपी यादव मुद्दे पर अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी की थी। मोहन सिंह ने कहा था कि डीपी यादव बड़े नेता हैं और अखिलेश को डीपी के बारे में कुछ भी कहने का हक नहीं है। इससे पहले सपा के महासचिव आजम खान ने भी डीपी यादव की तारीफ की थी लेकिन बाद में आजम अपने बयान से मुकर गए थे।

दरअसल सपा नेता शिवपाल सिंह यादव की पहल पर डीपी यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल करने की बात चल रही थी। पार्टी महासचिव आजम खान डीपी यादव को पार्टी में शामिल किए जाने की वकालत कर रहे थे। लेकिन अखिलेश ने साफ शब्दों में डीपी यादव को पार्टी में लेने से इनकार कर दिया था। इसकेबाद ही मोहन सिंह ने अखिलेश के खिलाफ बयान दिया था। इसी तरह अमर सिंह प्रकरण में भी मोहन सिंह ने बढ़-चढ़ कर बयान दिया था। लेकिन उस समय पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इसका फायदा दिया और अमर सिंह को निकाले जाने के पहले ही मोहन सिंह को उनके स्थान पर स्थापित करने की घोषणा कर दी गई थी|

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