पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान एक हादसे में घायल हो गयी थीं इसलिए उन्हें व्हील चेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार करना पड़ा। आठ चरणों के लंबे चुनाव प्रचार का सफर उन्होंने व्हील चेयर के सहारे पूरा किया और एक तरह से व्हील चेयर ने ही उन्हें सीएम की चेयर तक पहुँचा दिया। हालांकि ममता बनर्जी की व्हील चेयर के जवाब में भाजपा ने व्हील चेयर रैली भी निकाली जिसमें अधिकांश उन लोगों ने हिस्सा लिया जोकि कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की हिंसा के पीड़ित थे।
भाजपा बार-बार यह कहती रही कि ममता बनर्जी जानबूझकर व्हील चेयर पर बैठी हैं ताकि लोग भावनाओं में बहकर उनके लिए मतदान कर सकें। भाजपा माँग करती रही कि पैर की चोट के संबंध में ममता बनर्जी अपनी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करें। यही नहीं पार्टी ने चुनाव प्रचार के बीच में ही एक वीडियो भी जारी किया जिसमें ममता बनर्जी कथित रूप से घायल पैर को हिलाते हुए नजर आ रही थीं। भाजपा की बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने ममता बनर्जी की इस चोट पर कई बार टिप्पणियां भी कीं जिस पर विवाद हुआ।
खुद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम की घटना को साजिश बताया था लेकिन चुनाव आयोग ने अपनी जाँच में पाया था कि वह महज एक हादसा था। तृणमूल कांग्रेस भी इस बात का कोई सुबूत नहीं पेश कर पाई थी कि ममता बनर्जी पर कोई हमला हुआ था। बहरहाल, ममता बनर्जी ने चाहे रोड शो किये चाहे वह सभाओं में आईं, वह व्हील चेयर पर बैठकर ही जनता के समक्ष अपनी बात रखती रहीं। यही नहीं जब चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी पर 24 घंटे तक प्रचार करने से रोक लगाई तो उन्होंने व्हील चेयर पर बैठकर ही धरना दिया। एक जुझारू नेत्री की जो उनकी छवि है वह इस चुनाव में और पुख्ता हुई क्योंकि उन्होंने कथित रूप से घायल अवस्था में ही भाजपा से अकेले मुकाबला किया।

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