उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास संशोधन अध्यादेश के तहत तय समय में अगर प्राधिकरण द्वारा आवंटित प्लाट पर इंडस्ट्री नहीं लगाई गई तो उस प्लाट का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। उसे लैंड बैंक में शामिल कर अन्य निवेशकों को आवंटित किया जाएगा। इससे संबंधित विधेयक विधानसभा के आगामी सत्र में पास कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन कई प्रस्तावों को मंजूर कराया। औद्योगिक विकास विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक पहले चिन्हित निवेशकों को नोटिस दिया जाएगा और कहा जाएगा कि अगर एक  साल में अपना प्रोजेक्ट नहीं लगाया तो जमीन का आंवटन रद् हो जाएगा।

हाल ही में मुख्यमंत्री ने आदेश दिया था कि जो लोग औद्योगिक इकाई के नाम पर प्लाट लेकर उद्योग नहीं लगा रहे हैं, उनके प्लाट आवंटन रद कर दिए और दूसरे निवेशकों को बेचा जाए  ताकि  औद्यौगिक विकास की परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी को दूर किया जा सके। इसके मुताबिक आवंटित की गई जमीन का उपयोग कब्जा के वर्ष की अवधि या आवंटित किए जाने की शर्त के तहत नियत अवधि जो भी अधिक हो, के भीतर नहीं किया जाएगा तो आवंटन व पट्टा विलेख रद्द माना जाएगा। जिन मामलो में यह अवधि पहले ही पूरी हो गई हो वहां एक साल के भीतर उपयोग करने की नोटिस दी जाएगी।

वेयर हाउस व लॉजिस्टिक पार्क लगाने वाले  को अब औद्योगिक दर पर मिलेगी जमीन  
सरकार ने वेयर हाउस व लॉजिस्टिक पार्क लगाने वाले निवेशकों को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। उन्हें उद्योग का दर्जा पहले ही दिया जा चुका है। अब उन्हें औद्योगिक रेट पर जमीन मिल सकेगी। जो बाजार रेट के मुकाबले काफी कम होगी। इसके लिए कैबिनेट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश वेयर हाउसिंग और लॉजिस्टिक पार्क  नीति–2018 में एक बार फिर बदलाव कर दिया है।

इसके मुताबिक अब इस क्षेत्र में वेयरहाउस व लाजिस्टिक पार्क बनाने वाले यूनिटों को औद्य्रोगिक रेट पर ही जमीन उपलब्ध हो सकेगी। अभी तक ऐसी  यूनिटों के लिए औद्योगिक रेट का 1.5 गुना लेने का प्रावधान हाल में ही कैबिनेट ने किया था। लेकिन अब सरकार ने इस तरह की इकाईयों को और राहत दे दी है।

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