मुख्तार अब्बास नकवी से पंगा लेना साबिर को महंगा पड़ा। साबिर का आना वैसे शहनवाज को भी खला था लेकिन वह कुछ नहीं कह पाए। आधार बढ़ाने की हड़बड़ाहट में भाजपा ने जदयू से निष्कासित विवादित नेता साबिर अली को शामिल तो करा लिया, लेकिन प्रमोद मुथलिक की तरह ही पैर वापस लेने पड़े। यानी फजीहत भी हुई और नुकसान भी उठाना पड़ेगा। हालांकि राजनाथ सिंह ने नेताओं को सार्वजनिक बयान देने की मनाही कर दी है। नकवी के खुले विरोध के बाद साबिर अली ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। उन्होंने कहा है कि मैं नकवी के खिलाफ मानहानि का केस करूंगा। मैं नकवी के साथ बहस के लिए तैयार हैं। मुझे लोगों का समर्थन हासिल है। नकवी के गांव के साथ ही देश के किसी भी गांव में मैं जाने को तैयार हूं। इसके बाद पता चलेगा कि कितने लोग उनके नकवी के साथ खड़े हैं। गौरतलब है कि शुक‎वार को साबिर अली को पार्टी में शामिल किया गया था। जिस पर पार्टी के अंदर ही आग भडक़ गई। पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने ट्वीट किया भटकल का दोस्त आ गया है ण्अब दाऊद की बारी है। तत्काल संघ ने भी भाजपा नेतृत्व से अपनी आपत्ति जताई दी। संघ विचारक गुरुमूर्ति से लेकर राम माधव तक ने ट्वीट कर कहा कि पार्टी के इस फैसले से बहुत असंतोष है।
सूत्रों का कहना है कि चुनाव के मुहाने पर खड़ी पार्टी के अंदर मचे बवाल ने ऊपर तक हर किसी को परेशान कर दिया। बताते हैं कि नकवी के शब्दों के चयन पर भी चर्चा हुई। कई नेताओं का मानना था कि जिस तरह नकवी ने सार्वजनिक रूप से पार्टी को कठघरे में खड़ा कियाए उससे ज्यादा फजीहत हुई। यही कारण है कि राजनाथ ने साबिर अली की सदस्यता निरस्त तो कर ही दी। साथ ही यह संदेश भी दे दिया कि कोई भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता सार्वजनिक बयानबाजी न करे। दरअसल पार्टी नेताओं का मानना है कि जिस तरह पार्टी के अंदर बयानबाजी हुईए उससे ज्यादा नुकसान हुआ। लेकिन यह भी सवाल खड़ा होने लगा है कि एक के बाद एक इस तरह के लोग शामिल कैसे हो रहे हैं। दरअसल सूत्रों की मानें तो चुनावी तैयारी से ज्यादा कई लोग अपना नंबर बढ़ाने में लगे हैं।इसी क्रम में बिहार भाजपा में कुछ लोग शामिल कराए गए थे। साबिर का आना भी उसी क्रम की कड़ी माना जा रहा है। लेकिन उसमें पार्टी यह भी भूल गई कि छवि से कोई भी समझौता उसके लिए घातक होगा।

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