राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक ओर जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में दरार खुलकर साफ नजऱ आने लगी वहीं वाममोर्चा में भी एक राय कायम नहीं हो सकी।नतीजा ये हुआ कि गुरुवार को एनडीए का नेतृत्व करने वाली भाजपा ने पीए संगमा को अधिकृत तौर पर समर्थन देने का ऐलान किया तो एनडीए के एक अहम घटक दल जनता दल (यू) ने यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा कर दी। एनडीए के एक और अहम घटक दल शिवसेना ने भी पहले से ही प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। उधर ममता बनर्जी अब भी कलाम के नाम पर अड़ी हैं। इसलिए अब यह तय माना जा रहा है कि ममता बनर्जी प्रणब मुखर्जी को देर सबेर समर्थन जरूर देंगी। संगमा के नाम पर ममता राजी नहीं हैं।
दूसरी ओर वाममोर्चे की एक घंटे चली बैठक के बाद वामपंथी दल किसी एक नतीजे पर नहीं पहुँच सके. आखऱि में तय हुआ कि वाममोर्चे के दो दल माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और फॉर्वर्ड ब्लॉक दोनों प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेंगे वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और आरएसपी ने मतदान में हिस्सा न लेने का फ़ैसला किया। इससे साफ़ हो गया है कि राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के मुक़ाबले के लिए मैदान में पीए संगमा होंगे, जिन्हें अब भाजपा सहित कई दलों ने समर्थन का आश्वासन दिया है.राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 19 जुलाई को होने हैं। पत्रकारों को जानकारी देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, हमारे पास दो विकल्प थे एक ऐपीजे अब्दुल कलाम और दूसरा पीए संगमा. लेकिन कलाम ने जब ये घोषणा की कि वे चुनाव की दौड़ में शामिल नहीं है तो भाजपा ने फैसला लिया कि वह अधिकृत रूप से पीए संगमा की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी।

शिवसेना अकालीदल और जद यू के बाद मेनका गांधी प्रणब मुखर्जी के पक्ष में खुलकर आने से राजग का समीकरण गड़बड़ा गया है। कई बड़े नेता प्रणब का विरोध करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। लेकिन राजग के सामने प्रत्याशी खड़ा करना अब उनकी मजबूरी है। भागते भूत की लंगोटी वाली कहावत भाजपा पर लागू होती दिख रही है। राजग के सामने संगमा को समर्थन देने के अलावा कोई चारा नहं बवा है।
यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लडऩे पर अड़े पी. ए. संगमा ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। एनडीए के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने मीडिया को संगमा का इस्तीफा पढक़र सुनाया। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि संगमा एनडीए का उम्मीदवार हो सकते हैं। इस बाबत आडवाणी के आवास पर आज शाम 6 बजे बैठक बुलाई गई है।  संगमा पर राष्ट्रपति चुनाव न लडऩे के लिए पार्टी की ओर से काफी दवाब था। उन्हें चुनाव लडऩे पर पार्टी से निकाले जाने और बेटी अगाथा संगमा को यूपीए सरकार में मंत्री पद से हटाने की चेतावनी तक दी गई थी। अपने इस्तीफे में संगमा ने कहा है कि वह पार्टी के रवैये से दुखी हैं और इस्तीफा दे रहे हैं।
गौरतलब है कि बीजेपी प्रणव मुखर्जी को किसी भी हाल में वॉकओवर नहीं देना चाह रही है और इसके लिए वह जयललिता और नवीन पटनायाक के उम्मीदवार संगमा को समर्थन देने के लिए भी तैयार है। लेकिन, उसकी दुविधा यह है कि अगर अंत में संगमा बैठ गए तो पार्टी की काफी छीछालेदर होगी। बताया जा रहा है कि बीजेपी की इसी आशंका को दूर करने के लिए उन्होंने एनसीपी से नाता तोड़ लिया है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के इनकार के बाद गैर-यूपीए दलों को एकजुट करने की बीजेपी को कोशिश परवान नहीं चढ़ पाई। खुद उसके सहयोगी शिवसेना ने खुले तौर पर और जेडीयू ने परोक्ष रूप से प्रणव मुखर्जी को समर्थन की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर सत्ताधारी पार्टियों के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहती है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि संगमा एक बार नामांकन करा लें, तो फिर उन्हें बीजेपी की ओर से समर्थन की घोषणा की जा सकती है।

 

sonia-gandhi-being-welcomed-by-pranab-mukherjeeपूर्व राष्ट्रपति के चुनाव मैदान से हटने से ममता की फजीहत, इज्जत बचाने को संगमा का समर्थन कर सकती है भाजपा राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भले ही एनडीए में असमंजस की स्थिति हो, लेकिन उसके घटक दल शिवसेना ने अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का समर्थन करेगी। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने सोमवार देर रात कहा, ‘शिवसेना प्रणव मुखर्जी का समर्थन करेगी|

सूत्रों ने बताया कि शिवसेना ने अपना रुख उस वक्त साफ किया जब मुखर्जी ने पार्टी प्रमुख बाल ठाकरे और उनके बेटे उद्धव ठाकरे से बातचीत की। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी की सबसे पुरानी वैचारिक सहयोगी शिवसेना ने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए के रुख पर भी चिंता जताई है। उसने अब तक एनडीए द्वारा अपना उम्मीदवार नहीं चुने जाने पर भी निराशा जताई है|

गौरतलब है कि 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में भी शिवसेना ने एनडीए के उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत का समर्थन नहीं किया था। तब पार्टी ने यूपीए उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था क्योंकि वह महाराष्ट्र की हैं।

बीजेपी कोर समूह की बैठक, संगमा को समर्थन करने की संभावना

राष्ट्रपति पद की दौड़ में ए.पी.जे अब्दुल कलाम के शामिल होने से इनकार किए जाने के बीच बीजेपी के कोर ग्रुप की सोमवार रात हुई बैठक में संगमा के नाम पर विचार किया गया। इस बैठक में यूपीए उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का विरोध नहीं करने और जेडीयू के रुख समेत पार्टी की रणनीति पर भी बातचीत की गई।बैठक के बाद कलाम द्वारा दौड़ में शामिल नहीं होने पर पार्टी के रुख के बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया। लेकिन पार्टी सू़त्रों ने कहा कि एनडीए के सभी दलों से जल्द ही विचार किया जाएगा।सूत्रों ने बताया कि बीजेपी इस बात पर कायम है कि 2014 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए और एआईडीएमके और बीजेडी जैसे दलों को अपने साथ लाने की संभावना को जेहन में रखते हुए राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला होना चाहिए। कलाम के दौड़ से बाहर होने के बाद बीजेपी द्वारा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा को समर्थन दिए जाने की संभावना है। एआईडीएमके और बीजेडी ने संगमा को समर्थन देने की घोषणा पहले ही कर दी है। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए तृणमूल कांगेस से भी संपर्क कर सकता है।

पूर्व राष्टपति बिना सहमति के अपना नाम उछाले जाने पर नाराज चुनाव न लडऩे का किया ऐलान

Dr APJ Abdul Kalamपूर्व राष्टपति कलाम का चुनाव में न उतरने का फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। कलाम ने पिछली बार भी अपने कदम वपास खींच लिए थे। ममता बनर्जी ने बिना किसी से सलाह लिए कलाम का नाम उछाल कर मिसाइल मैन का बहुत अपमान किया है। ममता बनर्जी ने कलाम को उसी श्रेणी में रखा जिस श्रेणी में मुकुल रॉय थे और ममता की कृपा पर रेल मंत्री बने। इस बार ममता अपनी हठ के कारण चारों खाने चित हुई हैं। वह बार बार कलाम का नाम लेकर उन्हें अपमानित ही कर रही हैं।  पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राष्ट्रपति चुनाव नहीं लडऩा चाहते हैं। एनडीए के पास जीत के लिए जरूरी बहुमत न होने के कारण कलाम के राष्टï्रपति चुनाव में खड़े होने की संभावना बेहद कम है। इससे पहले एनडीए ने कलाम को मनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया, जिससे यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी को दमदार चुनौती पेश की जा सके। बीजेपी के सबसे सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने दो बार अपने दूत सुधींद्र कुलकर्णी को कलाम के पास भेजा और उसके बाद उनसे खुद बात की। सूत्रों के मुताबिक कलाम ने कुलकर्णी के माध्यम से चुनाव में खड़ा न होने का संदेश भिजवाया|

जयललिता और नवीन पटनायक के उम्मीदवार पी.ए. संगमा को ममता बनर्जी और शिवसेना के समर्थन न देने के ऐलान के बाद एनडीए की पूरी कोशिश थी कि प्रणव के खिलाफ कलाम को विपक्ष के सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाए। इस बीच कलाम के अलावा किसी और को सपोर्ट न करने का ऐलान कर चुके बाल ठाकरे से प्रणव मुखर्जी ने बात की और अपने लिए समर्थन मांगा|

ममता लेंगी बड़ा फैसला

दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी सोमवार को कोलकाता में शाम 6 बजे एक अहम बैठक करने जा रही हैं। इस बैठक में टीएमसी के सभी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को शामिल होने का फरमान भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि बैठक में ममता यह फैसला ले सकती हैं कि वह यूपीए के साथ रहेंगी या नहीं?

राष्ट्रपति पद के लिए प्रणव मुखर्जी को दावेदार घोषित कर चुकी यूपीए समते सभी पार्टियों और एनडीए की नजरें कलाम पर टिकी हैं। कलाम का फैसला राष्ट्रपति चुनाव पर एनडीए का रुख तो तय करेगा ही, साथ में यूपीए के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी को भी बढ़ाएगा। ऐसी संभावना है कि संगमा से मुलाकात के बाद कलाम इस पर कोई फैसला लेंगे। संगमा दोपहर लंच पर कलाम से मिलने वाले थे। राष्ट्रपति चुनाव मुद्दे पर ही बीजेपी ने आज रात 9 बजे अपनी कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। संगमा ने ममता बनर्जी से अपने लिए समर्थन मांगा लेकिन तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने उनसे ही कलाम के समर्थन में बैठने की अपील कर डाली।

शिवसेना दे सकती है प्रणव को समर्थन

राष्ट्रपति पद को लेकर एनडीए में आम राय नहीं बन पा रही है। शिवसेना कलाम को समर्थन देने के लिए तैयार है, पर संगमा के नाम पर राजी नहीं है। कलाम के चुनाव लडऩे की स्थिति में वह प्रणव मुखर्जी को समर्थन दे सकती है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ही सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं। राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी बरकरार रहने का दावा करने वाले संगमा ने शिवसेना प्रमुख से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन बाल ठाकरे ने मिलने से इनकार कर दिया|

नीतीश ने कहा, अभी फैसला नहीं

वहीं, नीतीश कुमार ने कहा है कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है और सभी की सहमति से फैसला लिया जाएगा। नीतिश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पीएम मनमोहन सिंह और प्रणव मुखर्जी ने उन्हें फोन किया था। उन्होंने कहा, सभी पार्टियों की सहमति से ही राष्ट्रपति चुने जाने चाहिए। शरद यादव ने कहा है कि एनडीए में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार को लेकर कोई मतभेद नहीं है|

पर्दे के पीछे हो रही है डील ममता

कलाम को समर्थन के लिए फेसबुक पर मोर्चा खोल चुकीं ममता ने आरोप लगाया है कि इस पद के लिए पर्दे के पीछे डील हो रही है। रविवार को उन्होंने भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त के खिलाफ आवाज़ उठाई और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए पिछले दो-तीन दिन में हुए घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए गड़बडिय़ों के कई संकेत दिए।

अपनी फेसबुक अपील को लोगों के समर्थन से उत्साहित ममता बनर्जी ने लोगों को शुक्रिया कहा और लिखा, ‘मुझे विश्वास है कि हमारी एकजुट आवाज़ इस मुद्दे को अगले स्तर तक ले जाएगी।’ उन्होंने भारत के सभी नागरिकों से भ्रष्टाचार के खिलाफ, परदे के पीछे से होने वालीं डील्स, चालबाजियों के खिलाफ आवाज़ उठाने की भी अपील की। ममता ने राजनीति में नैतिकता और सिद्धांतों के घटते स्?तर पर दुख भी जताया है। उन्होंने लिखा है, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे महान देश में राजनीति संदेहजनक हो गई है और धन, सत्ता और घोटालों के इस्तेमाल से मूल्यों, जनहित के साथ समझौता किया गया है|

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