Narendra Modi Sword Against Congressकांग्रेस इन दिनों विपक्ष पर आगबूबला हो रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का कद भाजपा में जब से और बढ़ा है तब से वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस पर तीखे हमले कर रहे हैं। नरेन्द्र मोदी ने इस बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर निशाना साधा है। अरुणाचल प्रदेश में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि नॉर्थ-ईस्ट में चुनाव प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि अगर यहां की जनता कांग्रेस उम्मीदवार को जिताएगी तो प्रशासन बाइबल के मुताबिक चलेगा। मोदी ने प्रधानमंत्री पर हमले और तेज करते हुए कहा कि पीएम असोम से संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं फिर भी पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उन्होंने आज तक किया ही क्या है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री पर अमेरिकापरस्त का आरोप जड़ते हुए यहां तक कह डाला कि रुपए को जानबूझ कर कमजोर व डालर को मजबूत किया जा रहा है। विपक्ष के आरोपों का माकूल जवाब देने की बजाय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यहां तक कहते हैं कि केंद्र सरकार, कांग्रेस पार्टी और सरकार के सहयोगी साजिश के शिकार हैं। अक्सर लगने वाले इस आरोप से कांग्रेस भी अपना आपा खेती जा रही है। वह आरोपों के बाण सहे या फिर महंगाई पर सहयोगियों के ताने और नखरे सहे। सच भी है कि बढ़ती महंगाई के कारण उसके सहयोगी दल ही नाक में दम किए हैं तो विपक्ष को इसकी जरूरत ही क्या है। जो काम विपक्ष को करना चाहिए वह सत्ता में सहयोगी दल ही कर रहे हैं। कांग्रेस ने रामदेव और अन्ना पर भी निशाना साधा है। कांग्रेस कार्यसमिति कांग्रेस का सर्वोच्च नीति निर्धारक निकाय है और पार्टी के 126 साल पुराने इतिहास में कम ही मौके ऐसे आए हैं, जब इसकी बैठक से खबरों के लिए कोई जोरदार मसाला बाहर आया हो। लोगबाग सोच रहे थे कि विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन, यूपीए सरकार की घेरेबंदी जैसी हालत, और पार्टी के भविष्य की ओर संकेत करने वाले राष्टï्रपति चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बार की बैठक कुछ बड़े नतीजों के साथ संपन्न होगी। ऐसा नहीं हुआ, बैठक के बाद जारी बयान इसे महज एक रुटीन बैठक ही साबित करते हैं तो इसमें अस्वाभाविक क्या है? कांग्रेस कार्यसमिति की बैठकें ऐसी ही होती हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दोनों का कहना था कि उनकी सरकार खासकर मंदी को देखते हुए जनता को राहत पहुंचाने का अनूठा काम कर रही है। दोनों ने कहा कि विपक्ष और टीम अन्ना व रामदेव सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके अलावा दो बातें और कहीं कि पार्टी पूरी ताकत से सरकार के साथ है, और पार्टी के नेता गुटबाजी छोडक़र आम कार्यकर्ता पर भरोसा करें तो सब ठीक हो जाएगा। जब पार्टी पर लगातार प्रहार हो रहे हो तब कार्यकताओं का हौसला बढ़ाने के लिए ऐसी बातें कहीं ही जानी चाहिए। जब जब कांग्रेस परेशानियों में घिरी है तब तब कांग्रेस मुखिया को हल निकालना ही पड़ा है। भ्रष्टïाचार और दागी साथियों के कारण मुसीबत में पड़ी कांग्रेस पर विपक्ष खासतौर भाजपा हमलावर है और किसी भी मुद्दे पर सत्ता पक्ष को बख्शने के मूड में नहीं है। कांग्रेस कार्यकारिणी की सामूहिक राय यह थी कि कांग्रेस को न सिर्फ अपने विरोधियों के सामने, बल्कि अपने सहयोगियों के सामने भी कहीं से झुकते, कमजोर पड़ते नहीं दिखना चाहिए। इसका क्या मतलब निकाला जाए? यह कि कांग्रेस के प्रवक्ता अब पहले से ज्यादा मुखर होंंगे? या यह कि बचे हुए दो सालों में अगर सरकार अपने सहयोगियों की हठधर्मिता की वजह से गिरती है तो गिर जाए, उन्हें मनाने के लिए पार्टी उनके सामने घुटने नहीं टेकेगी? इनमें पहले वाला विकल्प निरर्थक है।  दूसरे वाले का कुछ मतलब जरूर हो सकता है, लेकिन इस विकल्प  पर पहुंचना जल्दबाजी ही होगी। कांग्रेस पार्टी को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि जमीन पर उसके कार्यकर्ता अगर चुप हैं और उसके नेता सार्वजनिक मंचों पर बगलें झांकते नजर आते हैं तो इसकी बुनियादी वजह कोई और कमजोरी नहीं, सिर्फ उनकी नीतिगत दुविधा है। कई मामलों में सरकार और पार्टी कोई फैसला नहीं ले पाती। लेती भी है तो उसके पक्ष में मजबूत तर्क नहीं दे पाती। मसलन, आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का कार्यकर्ता तेलंगाना पर क्या बोलेगा? मोदी के इंदिरा गांधी पर लगाए आरोप पर कांग्रेस प्रवक्ता सिर्फ इतना कह कर चुप हो जाते हैं कि मोदी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व अगर चीजों के बारे में साफ स्टैंड लिए बिना अपनी कतारों में आक्रामकता लाना चाहता है तो उसे खोखली आक्रामकता नहीं बल्कि एक रणनीति के तहत विपक्ष के आरोपों का ना सिर्फ जवाब देना चाहिए बल्कि हमलावर रुख भी बनाए रखना चाहिए।

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