ISRO 100th mission
ISRO 100th mission

प्रक्षेपण के मामले में अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 100वां मिशन पूरा कर लिया. श्रीहरिकोटा से रविवार को देश में बने रॉकेट पीएसएलवी-सी21 ने दो विदेशी उपग्रहों के साथ उड़ान भरी और उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया.

सुबह ठीक 9.53 बजे 44 मीटर लंबे और 230 टन वजनी स्वदेशी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-सी21(पीएसएलवी-सी21) ने दो विदेशी उपग्रहों के साथ उड़ान भरी. सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के करीब 18 मिनट बाद उसने पहले 712 किलोग्राम वजनी फ्रांसीसी उपग्रह एसपीओटी6 और फिर 15 किलोग्राम के लघु जापानी उपग्रह प्रायटेरेस को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया. ध्यान रहे कि फ्रांसीसी उपग्रह का प्रक्षेपण कर भारत ने एक नया इतिहास रच दिया है. यह भारतीय रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाना वाला अब तक का सबसे वजनी उपग्रह था. इससे पूर्व पीएसएलवी ने 2007 में इटली के 350 किलोग्राम वजनी एजाइल उपग्रह का प्रक्षेपण किया था.
आग की लपटों और धुएं के बीच 90 करोड़ रुपये की लागत वाला पीएसएलवी-सी21 रॉकेट जब आसमान की ओर बढ़ रहा था तब इसरो के नए रॉकेट मिशन नियंत्रण कक्ष में वैज्ञानिक कंप्यूटर स्क्रीन से चिपके रहे. रॉकेट को आसमान की ओर जाते देख रहे प्रक्षेपण केंद्र पर मौजूद शीर्ष वैज्ञानिकों के चेहरों पर उस समय चिंता की लकीर गहरा गई, जब पीएसएलवी अपने निर्धारित मार्ग से थोड़ा भटक गया लेकिन उसके जल्द ही सही रास्ते पर आ जाने से उनके चेहरे फिर खिल गए.
प्रक्षेपण के बाद खुशी से गदगद इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा कि इस सफल अभियान को लेकर हम अब तक कुल 62 उपग्रहों, एक स्पेस रिकवरी मॉड्यूल और 37 रॉकेट का प्रक्षेपण कर चुके हैं. इसरो ने सबसे पहले 1975 में आर्यभट्ट उपग्रह का प्रक्षेपण रूसी उपग्रह से किया था. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा पीएमओ में राज्यमंत्री वी नारायणसामी भी मौजूद थे. वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने उन लोगों को आड़े हाथ लिया, जो भारत की गरीबी का रोना रोते हुए अंतरिक्ष खोज पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा सवाल उठाते समय हम यह भूल जाते हैं कि देश का विकास तकनीकी कौशल का ही परिणाम होता है.
इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा है कि देश का अगला चंद्र अभियान चीन के साथ असफल अंतर ग्र्रहीय मिशन के बाद अब पूरी तरह से रूस के निर्णय पर निर्भर करेगा. उन्होंने इस बात का खंडन किया कि चीन के साथ भारत किसी भी किस्म के अंतरिक्ष युद्ध में जुटा है. राधाकृष्णन के अनुसार मंगल अभियान के लिए चीन के साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है. उसके साथ अंतरिक्ष युद्ध जैसी स्थिति नहीं है. उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 के लिए रूस ही हमें लैंडर (चांद की सतह पर उतरने के लिए यान) उपलब्ध करा रहा है. उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी को भारत-रूस साझा उपक्रम के तहत तैयार किया जा रहा है. देश का चंद्रयान-2 अभियान 2014 में जीएसएलवी के जरिये भेजा जाना प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि इसरो रॉकेट के साथ-साथ लूनर आर्बिटर एवं रोवर का निर्माण करेगा. इसरो प्रमुख ने बताया कि हम तो 2014 के इस अभियान के लिए तैयार हैं. थोड़ी बहुत देर अगर होगी तो वह रूस की तरफ से हो सकती है क्योंकि हाल में एक असफल अभियान के कारण रूस अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम संबंधी नीति की समीक्षा कर रहा है. रूस ने भरोसा दिलाया है कि वह समीक्षा के बाद निर्णय लेकर हमारा साथ देगा.

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