बिहार में लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद वाल्मीकिनगर बराज से सवा तीन लाख क्यूसेक पानी गंडक में छोड़े जाने के बाद उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति और विकराल हो गई है। दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वीं व पश्चिम चंपारण जिले की स्थिति बाढ़ से खराब होती जा रही है। बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार बांध व एनएच पर शरण लिये हुए हैं। मोतिहारी में बंजरिया में तिलावे नदी का बांध व सुगौली में रिंग बांध टूटने से अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है।

पिछले दो दिनों की बारिश व बराज से काफी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद मुजफ्फरपुर की पांचों प्रमुख नदियां खतरे के निशान को पार कर गई है। गंडक नदी जहां पारू व साहेबगंज में तबाही मचाने लगी है, वहीं बागमती व लखनदेई व मनुषमारा औराई, कटरा व गायघाट में तबाही मचाने लगी है। पांचों प्रखंड में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है और बड़ी संख्या में निचले इलाके के लोगों को बांध व एनएच पर शरण लेनी पड़ी है। बूढ़ी गंडक में उफान से मुजफ्फरपुर शहर के तटवर्ती हिस्सों में कई मोहल्ले बाढ़ के पानी से घिरे हैं।

चंपारण में घट नहीं रही तबाही :
पश्चिम चंपारण में बाढ़ से तबाही घटने का नाम नहीं ले रही है। मोतिहारी में बंजरिया में तिलावे नदी का बांध व सुगौली में रिंग बांध टूटने से खतरा काफी बढ़ गया है। तेतरिया ब्लॉक में सगहरी गांव के पास आरसीसी की पुलिया टूट गई है इसके सारूथ 12 फूट की लम्बाई में सड़क भी ध्वस्त हो गया है। संग्रामपुर, स्टेशन रोड पर भी बाढ़ का पानी चढ़ गया है।

मिथिलांचल में भी बढ़ा संकट :
दरभंगा में कमला जीवछ का पानी शहरी क्षेत्र पर दबाव बनाने लगा है। इसके अलावा 26 पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गईं हैं। यहां बागमती का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर हो गया है।  सीतामढ़ी में बाजपट्टी एनएच 104 व एनएच 57 पर भी बाढ़ का पानी चढ़ा हुआ है। यहां भी सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मधुबनी में शहर पर तो दबाव नहीं बढ़ा है, हालांकि ग्रामीण इलाकों में पानी के कारण फसलों का बहुत नुकसान हुआ है।

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