हांगकांग में पिछले एक हफ्ते से व्यापक प्रदर्शनों और तनाव का माहौल जारी है। हजारों की संख्या में एकत्र प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को अपना प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रखने की तैयारी शरू कर दी। उन्होंने अपनी जरूरत के लिए आवश्यक सामग्री एकत्र कर ली और अपना तम्बू लगाने के साथ सड़कों पर अवरोध खड़ा कर दिया।

इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए काली मिर्च का स्प्रे किया था और लाठीचार्ज का सहारा लिया था। उनकी संख्या में काफी वृद्धि हो रही है। प्रदर्शनकारी जिनमें अधिकांश छात्र हैं अपनी रातें सड़कों पर बिता रहे हैं। वे 2017 में चुनाव में पूर्ण लोकतंत्र चाहते हैं। चीन उनकी इस मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। चीन चाहता है कि इसे चीन सरकार की एक कमेटी तय करेगी कि हांगकांग में नेतृत्व के लिए कौन उम्मीदवार हिस्सा लेगा।

क्या है मामला
– इंग्लैंड ने सन 1997 में हांगकांग की संप्रभुता यहां की पूंजीवादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने की शर्तों पर चीन को सौंपी और चीन ने भी रक्षा व विदेश छोड़कर आगामी पचास वर्षों तक हांगकांग की प्रशासकीय व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करने का आश्वासन दिया।

– लेकिन धीरे-धीरे चीनी हस्तक्षेप बढ़ने लगा। जिससे हांगकांग के निवासी लोकतंत्र, मानवाधिकार और मताधिकार को लेकर चिंतित हुए।

– चीन ने हांगकांग को एक विशिष्ट प्रशासकीय क्षेत्र घोषित करते हुए ‘एक देश दो प्रणाली’ का फार्मूला तो अपनाया, लेकिन लंबे समय तक उस पर कायम नहीं रह पाया।

– जल्दी ही हांगकांग के लोगों को चीन के इरादे समझ में आने लगे और इस वर्ष की शुरुआत में 50 हजार से ज्यादा लोग सड़कों पर बीजिंग समर्थित माने जाने वाले चीफ एग्जीक्यूटिव लिंग शुन-यिंग के विरोध में सड़कों पर उतर गए।

– ताजा आंदोलन में जनता चाहती है कि वे अपना प्रतिनिधि लोकतांत्रिक तरीके से चुनें, न कि कोई समिति यह कार्य करे जिसमें चीनी समर्थक सदस्य भरे हों। वे अपने मीडिया और अर्थव्यवस्था को स्वतंत्र रखना चाहते हैं।

– जानकारों का मानना है कि अगर चीनी हस्तक्षेप इसी प्रकार जारी रहा तो हांगकांग की स्थिति में इससे भी बड़ा उबाल आ सकता है।

क्या है चीन का रुख
चीन ने कहा है कि हांगकांग में चल रहे लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में किसी भी बाहरी मदद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि हांगकांग में चल रहा आंदोलन गैरकानूनी है और चीन अपने आंतरिक मामले में किसी भी हस्तक्षेप का विरोध करता है।
चीन ने हांगकांग में चल रहे आंदोलन के बारे में सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की बहस पर पाबंदी लगा दी है।

ब्रिटेन का रुख
ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि हांगकांग की प्रगति और सुरक्षा हांगकांग के लोगों के अधिकारों, आजादी और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार पर निर्भर करती है।

हांगकांग प्रशासन का रुख
हांगकांग के मुख्य कार्यकारी सीवाई लेउंग ने प्रदर्शनों को गैर कानूनी बताया है और कहा है कि चुनाव योजना के मुताबिक होंगे।

हांगकांग: एक परिचय
– आधिकारिक तौर पर चीन का एक विशेष प्रशायनिक क्षेत्र हांगकांग लगभग 200 छोटे-बड़े द्वीपों का समूह है जिसका शाब्दिक अर्थ है सुगंधित बंदरगाह। इसके पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में दक्षिण चीन सागर है।

– हांगकांग एक वैश्विक महानगर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र होने के साथ-साथ एक उच्च विकसित पूंजीवादी अर्थव्यवस्था है। “एक देश, दो नीति” के अंतर्गत इसे विदेश और रक्षा क्षेत्र को छोड़कर सभी क्षेत्रों में उच्च स्तर की स्वायत्तता प्राप्त है। हांग कांग की अपनी मुद्रा, कानून प्रणाली, राजनीतिक व्यवस्था, अप्रवास पर नियंत्रण, सड़क के नियम हैं।

– शहर की आबादी 95% हान जाति के और अन्य 5% है। 70 लाख लोगों की आबादी और 1,054 वर्ग किमी (407 वर्ग मील) क्षेत्रफल वाला हांग कांग दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है।

– हांगकांग वासियों ने हर क्षेत्र में असाधारण तरक्की की। गगनचुम्बी इमारतें, अत्याधुनिक यातायात व्यवस्था, भ्रष्टाचार रहित प्रशासन और सबसे महत्वपूर्ण तीव्र आर्थिक प्रगति ने हांगकांग को एक वैश्विक औद्योगिक और वित्तीय केंद्र बनाया। हांगकांग डॉलर दुनिया की 9वें नम्बर की कारोबारी मुद्रा है।

इतिहास
– सन 1839 से 1842 के बीच प्रथम अफीम युद्ध में चीन की हार हुई और उसे हांगकांग, इंग्लैंड को देना पड़ा। तब से लेकर 1997 तक हांगकांग इंग्लैंड का उपनिवेश रहा।
– सन 1941 में प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान करीब चार वर्षों के लिए जापान ने इस पर कब्जा कर लिया।
– 1945 में इंग्लैंड और चीनी सेना ने मिलकर जापान को खदेड़ा।
– 1983 में इसे एक ब्रिटिश निर्भर क्षेत्र (प्रोटेक्टोरेट) के रूप में घोषित किया गया।
– 1997 में चीन को संप्रभुता हस्तांतरित कर दी गई।1~24~10~2014~1414139007_storyimage

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