वैद्याचार्य डॉ. स्वदेश अग्रवाल
वैद्याचार्य डॉ. स्वदेश अग्रवाल

वैद्याचार्य डॉ. स्वदेश अग्रवाल
पाश्चात्य चिकित्सा पैथी में रोगों के लक्षणों को ही रोग मान लेते हैं तथा हजारों रुपये की जांच कराने में पैथोलॉजी लेब में व्यर्थ खर्च कराने वाले डाक्टर अपने को विशेषज्ञ कहते है तथा चिकित्सा करते हैं। जब लिवर में अग्नितत्व बढक़र वायु के साथ पित्त मिलकर उपद्रव करने लगता है तो आधुनिक प्रयोगशाला वाली रिपोर्ट भी नार्मल आती है। जिसे न समझते हुए भी आधुनिक डाक्टर मजबूरी में कुछ न कुछ देते रहते हैं। जिसका परिणाम मृत्यु या ऑपरेशन में बदलकर खतरनाक होता है। परन्तु आयुर्वेद कल्प चिकित्सा रोगों में मूल कारणए विजातीय द्रव्य संचित होनेए को निदान में लेती है। जिसका निदान सामान्यत: बच्चे व बड़े भी कर लेते हैं जैसे बड़ी आंत में मल संचित होते ही भूख चली जाती है सुस्ती आती हैए स्वाद बिगड़ जाता है। 72 करोड़ 72 लाख दस हजार दो सौ नॉडिय़ों के द्वारा दूषित वायु के माध्यम से जहां.जहां रोग शरीर में जाता रहता है तो रोगों के नाम बदलते रहते हैं और शरीर में सातों धातु बिगड़ कर शरीर को कमजोर कर चेहरे के ओज को ही समाप्त कर देती है। परम्परागत वैद्य लोग हाथ की कलाई पर उंगलिया रखकर ;नाड़ी परीक्षाद्धए वात पित्त कफ के असन्तुलन को समझ कर रोग के कारण और लक्षण को समझ लेते हैं जिसका रोगी पूर्ण समर्थन करता जाता है अस्तु आयुर्वेद का परम्परागत ज्ञान वनस्पतियों की निकट से पहचानए औषधियों का स्वत: निर्माणए वैद्यों की दूर दर्शिता शुद्ध भावनाएं परोपकारए सांत्वनाए स्पर्श चिकित्साए दृष्टि चिकित्सा से भी रोगी का रोग भी बहुत कुछ ठीक हो जाता है। ऐसा ऋग्वेद और अथर्ववेद में मंत्रों में स्पष्ट देखा व पढ़ा जा सकता है।

1 टिप्पणी

  1. dis is 100% true…nd ayurvedic drugs affect longer in comparision to allopathic drugs with no side effects…nd ayurvedic treatment is very less expensive…

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