दीदी पर भारी पड़े रतन टाटा, सिंगूर मामले पर कोर्ट ने ममता सरकार को दिया जोर का झटका

Mamata Singur caseलगता है आजकल ममता बनर्जी के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं। कुछ दिन पहले जहां केंद्र की यूपी सरकार पर अपनी हनक कायम रखती थी वहीं आजकल कदम कदम पर उनकी फजीहत हो रही है। पहले कोलकाता में ए्रक प्रोफेसर ने उप पर कार्टून बनाया तो ममता उस प्रोफेसर पर विफर पड़ी फिर उसके बाद राष्टï्रपति चुनाव में यूपीए से खासतौर पर प्रणब दा से पंगा लेकर मुंह की खाई और पूर्व राष्टï्रपति कलाम का अपमान तक करवाया अब शांत स्वभाव के रतन टाटा ने उनको पटखनी दी है। सिंगूर मामले पर कोर्ट ने ममत को करारा झटका दिया है। पश्चिम बंगाल में सालों से शासन करने वाली वाम सरकार की नींव उखाडऩे वाले सिंगूर मसले पर आज मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हाईकोर्ट में फजीहत हो गयी। हाईकोर्ट ने उनकी सरकार के इस मामले में पारित अधिनियम को संविधान के खिलाफ करार दिया है। कोलकाता हाईकोर्ट की दो जजों की एक पीठ ने कहा कि तृणमूल सरकार द्वारा पारित सिंगूर लैंड रिहैबिलिटेशन और डेवलपमेंट एक्ट 2011 संविधान के अनुरूप नहीं है। ममता ने यह अधिनियम तब पारित किया था जब वह सत्ता में आईं थीं।इस अधिनियम के जरिए सरकार को यह अधिकार मिला कि सिंगूर में टाटा मोटर्स को लीज पर दी गई एक हजार एकड़ की जमीन वह उन 400 किसानों को लौटा सके जिन्होंने जमीन देने में अनिच्छा जाहिर की थी। इससे पहले कोर्ट की एकल पीठ ने पिछले साल सितम्?बर में इस अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन टाटा ने इसके खिलाफ अपील दायर की और शुक्रवार का फैसला टाटा के हक में गया|

जस्टिस पिनाकी चंद्रा घोष और जस्टिस एम के चौधरी ने अपने फैसले में कहा कि सिंगूर एक्ट का क्षतिपूर्ति सेक्शन, जमीन अधिग्रहण एक्ट 1894 के अनुरूप नहीं है। इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे पारित करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति भी नहीं ली।ममता से पहले राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा सरकार ने टाटा मोटर्स को टाटा मोटर्स को हुगली जिले में सिंगूर में 997 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। इस जमीन पर टाटा की दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो का निर्माण करने की योजना थी। उस वक्त विपक्षी दल की भूमिका निभा रहे तृणमूल कांग्रेस ने इस योजना का विरोध किया और किसानों की जमीन वापस करने की मांग सरकार से की। जिन किसानों की जमीन ली गयी थी उनमें से 400 किसान चाहते थे कि उनकी जमीन उन्हें वापस की जाए।तृणमूल के आंदोलन के कारण टाटा मोटर्स 2008 में गुजरात के साणंद चली गई और उसने वहां कामकाज शुरू कर दिया। सिंगूर से विदाई के बाद टाटा मोटर्स ने वहां की जमीन का कब्जा नहीं छोड़ा।सत्ता में आने के बाद ममता सरकार ने सबसे पहले सिंगूर एक्ट पारित किया। जिसे टाटा मोटर्स ने अदालत में चुनौती दी|

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