नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र नाथ इस समय चुनाव के बारे में जनता की राय जानने के लिए देश भर में दौरा कर रहे हैं। चुनाव एक्सप्रेस तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जनता की राय और अपना हाल कितने कम शब्दों में रखा वह काबिले तारीफ है। नरेन्द्र नाथ की फेसबुक से जबरन लिया है: चुनावी मौसम में 19 दिन,18 राज्य,19 शहर,लगभग 15 हजार किलोमीटर और जनरल क्लास में सफर कर रहे हजारों लोगों से बात करते-उनकी सुनते देश( उत्तर-दक्षिण-पूरब-पश्चिम-सेंटर )का मिजाज जानने का अनुभव अद्भुद रहा। गोखले ने गांधी को सलाह दी थी-“अगर देश को जानना है तो पूरा देश घूमो,कम बोला,लोगों की सुनो। तब देश को जान पाओगे।” कितना सटीक और व्यवाहारिक सुझाव था,उसे भी जान सका।
इनके बीच,इनकी हालात और इनकी बातों को सुनकर राजनीति का वह डॉयलाग याद आया-“ये पेट की मारी जनता है साहब,चार झूठे वादे कर दो रोटी का आसरा दे दो,किसी रंग का झंडा थमा दो,उठा लेगी.”। सफर में कहीं किसी का गया एक लाइन पूरे राजनीतिक हालात और उनकी करनी को बता गया- “पच्चीस सालों से
एक बेडिंग है,एक अटैची है,जिसे लेकर सफर करता हूं। सालों में घर में एकाध नया सामान आ गया तो
करिश्मा समझें। भ्रम दूर कर लें। हकीकत यह है कि सरकार बदलती है,हमारी जिदंगी नहीं।” narendranaath.22jpg

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