जगत शर्मा की फेसबुक वॉल से साभार
Jagat Sharma

jagat sharmaतमाशा देखिये आज साईबाबा की भक्ति के प्रवक्ता वह लोग बने है जो स्वयं को प्रगतिशील कह कर इस प्रकार के तमाम पूजा पद्धतियों को पाखंड की श्रेणी में रखते आये है और हिन्दू समाज में व्याप्त बहुदेववाद के प्रखर आलोचक रहे है क्या यह बदलाव केवल सनातन समाज को दो भागो में विभक्त करने का षडयंत्र नहीं है क्या शंकराचार्य जैसे आस्था के केंद्र माने जाने वाले धार्मिक पद को कमतर करने का प्रयाश नहीं है और अगर है तो फिर हम इतने भीरु क्यों हो रहे है की अपनी ही सनातन जडे खोदने पर अमादा है पुरातन काल से आज तक तमाम संत महात्माओ ने अपने विचारो या आचरण से हमें प्रतिपादित किया है हमने उनके विचारो और आचरण का अनुशरण कर अपने चरित्र को उच्चता दी लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की हम किसी एक संत के पक्ष में खड़े होकर अपने अस्तित्व को ही गालियां देने लगे यह हमारे कमजोर चरित्र का ही नहीं वल्कि खोखली आस्था का भी प्रतीक है वाही दूसरी और बाजारवाद के कारण कई धार्मिक ब्रांड भी उतारे जाते है और समय समय पर उतारे गए है आश्चर्य बस इतना है की आज हरेक ब्रांड से समर्थन में सबसे पहले बाज़ारवाद के घोर आलोचक ही खड़े होते है बसर्ते उस समर्थन से भारत को कोई नुकसान पहुंचता हो —————जगत शर्मा \\\\दतिया

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.