61358924275_Rajnath2952भाजपाइयों में एक बात का टोटका पिछले कई सालों से चल रहा है। प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लखनऊ से ही होकर जाता है। इसलिए लखनऊ की सीट पर पहले से ही भाजपा के दिग्गजों की निगाहें लगी थी। राजनाथ और मोदी तक यहां से लडऩे को इच्छुक थे। लखनऊ अटल जी के लिए काफी लकी रहा है। वह लखनऊ से जीत कर ही दो बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। लखनऊ को लकी मान कर ही राजनाथ ने यहां से चुनाव लडऩे की ठान ली थी। कहने वाले तो राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री का दावेदार बता रहे हैं। राजनाथ ने भाजपा के कुनबे को फैलाया भी एक रणनीति के तहत है। उदितराज पासवान और भी कई नेता इसी रणनीति का हिस्सा हैं। राजनाथ की यह सीट सपा बसपा और कांग्रेस ने और आसान कर दी है। उसने राजनाथ सिंह के खिलाफ कोई मुस्लिम या दलित उम्मीदवार अब तक नहीं उतारा है। सवर्ण वोटों का बंटना तय है और यही राजनाथ सिंह की जीत का आधार भी। राजनाथ सिंह एक रणनीति के तहत चित्तौडग़ढ़ से भी किस्मत आजमा रहे हैं।
लखनऊ के चुनावी दंगल में पूरा सवर्ण समाज जुट गया है। कभी तिलक तराजू और तलवार इनके मारो जूता चार से सत्ता में आई बसपा ने भी यहां से दलित कार्ड न खेला। उसे भी ब्राह्मïण प्रत्याशी ही नजर आया। नकुल दुबे जो बसपा के कद्दावर नेता सतीश चन्द्र मिश्र के बेहद करीबी माने जाते हैं को लखनऊ सीट से टिकट दिया है। भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह लखनऊ से अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं। मुस्लिमों के हितो दम भरने वाली सपा ने यहां से डॉ. अशोक बाजपेयी को टिकट दिया है। पिछली बार उसने अभिनेत्री नफीसा अली को टिकट दिया था। गंगा जमुनी तहजीब पर राजनीति भारी पड़ गई। कांग्रेस जो कि इस समय संकट के दौर से गुजर रही है उसने रीता बहुगुणा जोशी पर फिर से दांव आजमाया है। रीता बहुगुणा जोशी की छवि अन्य कांग्रेसियों के मुकाबले साफ सुथरी है। लखनऊ से आम आदमी पार्टी ने लालबहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री को मैदान में उतारा है।

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