आर.के. लक्ष्मण ने अपने कार्टूनों के जरिए आम आदमी की रोजमर्रा की मुश्किल भरी जिंदगी को न सिर्फ दुनिया के सामने रखा, बल्कि राजनीतिक-सामाजिक मसलों पर उसकी मासूम-सी टिप्पणियों से लोकतंत्र में उसकी ताकत का एहसास कराया। लक्ष्मण ने अपने काटूर्नों में राजनीतिकों की जमकर खबर ली और इसके लिए उन्होंने हमेशा आम आदमी के नजरिये से सोचा।

उन्होंने साल 1951 में अपने कार्टून किरदार ‘कॉमन मैन’ की रचना की थी। जो बाद में किसी जीती-जागती हस्ती की तरह मशहूर हुआ। धोती, जैकेट, गांधी चश्मा पहनने वाला यह गंजा कॉमन मैन हिन्दुस्तान के किसी भी इलाके के मामूली आदमी का प्रतिनिधि बनकर उभरा। दशकों तक वह लक्ष्मण के कार्टूनों के जरिए लोगों के सामने आता रहा और अपनी बातों से उन्हें हंसाता-गुदगुदाता रहा। उसकी बातें साधारण अंदाज में कही गई होती थीं, जिनसे अकसर उसकी घर-परिवार की चिंता झलकती थी। लेकिन उसकी बातों में गहरा व्यंग्य होता था जो वास्तव में देश के राजनीतिक और शक्तिशाली वर्ग से सवाल होता था।

उन्होंने अपने कार्टूनों में भारतीय नेताओं की विशिष्टताओं के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया। पांच दशक से अधिक समय तक उनके प्रशंसकों  ने हर सुबह उनके कार्टूनों की प्रतीक्षा की। उन्होंने अपने कार्टूनों में समाज की विकृतियों और राजनीतिक विचारधारा की विषमताओं को निशाना बनाने में कभी नरमी नहीं बरती। उनके कार्टूनों से कई बार नेताओं को झेंपना पड़ा।

जन्मजात थी प्रतिभा
बचपन से ही चित्रकला में रुचि थी। पढ़ाई शुरू करने के पहले ही चित्र बनाने लगे थे। उनके एक अध्यापक ने पीपल के पत्ते पर उनका बनाया चित्र देखने के बाद उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनकी सराहना की। बाद में लक्ष्मण ब्रिटिश कार्टूनिस्ट सर डेविड लाउ से काफी प्रभावित हुए।

प्रधानमंत्री समेत कई हस्तियों ने जताया शोक
देश में लक्ष्मण की कमी महसूस होगी। हमारे जीवन में हास्य और चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए हम आपके हमेशा आभारी रहेंगे।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री 

लक्ष्मण ने अपने हास्य और सामाजिक रूप से प्रासंगिक संदेशों के जरिए लाखों देशवासियों की जिंदगी को छुआ। मैं उनके निधन से बेहद दुखी हूं।
-हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

लक्ष्मण का निधन एक संस्थान की समाप्ति है। उनके कॉमन मैन ने एक से अधिक पीढियों तक भारत का प्रतिनिधित्व किया।
-सोनिया गांधी, अध्यक्ष, कांग्रेस

अलविदा

नाम: रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण
जन्म: 24 अक्तूबर 1921, मैसूर
पिता: स्कूल शिक्षक
शिक्षा: मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातक
भाई-बहन: सात। बड़े भाई प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार आरके. नारायण
पत्नी: कमला (लेखिका)
दो उपन्यास लिखे: ‘होटल रिवेरा’,‘द मैसेंजर’ व ‘द टनल ऑफ टाइम’ आत्मकथा।

सम्मान
2012 :
पुणे पंडित अवार्ड, 2005 में पद्मविभूषण, 1984 में रमन मैगसेसे अवार्ड,बीडी गोयनका अवार्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स का दुर्गा रतन गोल्ड मेडल, 2001 में  उनके कॉमन मैन किरदार की प्रतिमा सिंबोसिस इंस्टीटय़ूट के परिसर में स्थापित हुई।

अंतिम संस्कार आज
पुणे।
कार्टूनिस्ट लक्ष्मण के पुत्र श्रीनिवास ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह होगा। लक्ष्मण की हालत पिछले कई महीने से खराब थी। दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की एक टीम नौ दिनों से उनकी स्थिति पर नजर रख रही थी। रविवार शाम से उनकी हालत बिगड़ने लगी। सोमवार शाम दिल का दौरा पड़ने के बाद उनका निधन हो गया।

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