थामसnobel एल्वा एडीसन ने बल्ब का आविष्कार कर दुनिया को रोशनी की राह दिखाई तब किसी ने न सोचा था कि रोशनी पर इतने ढेर सारे प्रयोग होंगे। इस बार दूधिया रोशनी को नोबल पुरस्कार के लिए चुना गया तो एडीसन फिर सामने आ गए।
भौतिकी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार की निर्णायक मंडली ने तीन वैज्ञानिकों को चुना है इन तीनों वैज्ञानिकों में से एक वैज्ञानिक अमेरिकी हैं और दो जापानी नोबेल पुरस्कार पाने वाले इन वैज्ञानिकों के नाम इसामू आकासाकी हिरोशी अमानो और सूजी नाकामूरा हैं
इन वैज्ञानिकों में से इसामू आकासाकी और हिरोशी अमानो जापानी हैं जबकि सूजी नाकामूरा अमेरिकी हैं गौरतलब है कि इन्हें एलईडी ब्लू लाइट फेंकने वाले डायोड के आविष्कार के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। इस आविष्कार की मदद से अब एलईडी लाइट से तेज सफेद रोशनी मिलती है और ऊर्जा की बचत भी होती है। लाल और हरी एलईडी हमारे आसपास वर्षों से हैंए लेकिन नीली एलईडी अभी तक संभव नहीं हो पायी थी। लेकिन इन वैज्ञानिकों की मदद से अब हमें वह भी मिल गई है।

कम खपत में मिलेगी ज्यादा रोशनी
यह एलईडी ब्लू लाइट एक तरह से ऊर्जा का नया स्रोत है और साथ ही इसके कई फायदे भी हैं। पूरी दुनिया में बिजली की जितनी खपत होती है। उसका एक चौथाई रोशनी करने के लिए खर्च होता है। ऐसे में एलईडी का यह आविष्कार ऊर्जा बचाने में काफी मददगार साबित हो सकता हैए जिससे कम खपत में हमें ज्यादा रोशनी का फायदा मिलेगा।
85 वर्षीय अकासाकी मेईजो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और नगोया यूनिवर्सिटी में भी प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं। 54 वर्षीय अमानो भी नागोया यूनिवसिर्टी में प्रोफेसर हैं जबकि 60 वर्षीय नाकामुरा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोनियाए सैंटा बारबरा में प्रोफेसर हैं। गौरतलब है कि अबतक 21 जापानियों को यह नोबेल पुरस्कार मिल चुका है जिसमें से 10 लोगों को भौतिकी के क्षेत्र में ही यह पुरस्कार मिला है

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