अरविन्द त्रिपाठी

कानपुर देश में कांग्रेस विरोधी राजनीतिक माहौल में अन्ना हजारे और उनके साथियों तथा बाबा रामदेव के आन्दोलनों ने देश के साथ-साथ कानपुर को भी प्रभावित किया है. भाजपा के अन्दर एक ख़ास वर्ग भी इस जन-विरोध के उभार को अपने पक्ष में करने की ललक रखता है. अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हजारे के राजनीतिक दल नहीं बनाने की स्थिति में पढ़े-लिखे और एलीट कहलाने वाले भाजपाई खासकर भाजपा पर भी लग रहे आरोपों की स्थिति में भाजपा से अलग होकर इस जन-उभार को अपने पक्ष में करना चाहते हैं. उनका असल इरादा भाजपा के ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ के नारे और अन्ना हजारे की कांग्रेस विरोधी मुहीम को शहरी मतदाताओं को साथ मिलाकर काकटेल बनाने का है. आगामी लोकसभा के त्रिशंकु होने की स्थिति में नंबर और पावर के खेल में सत्ता की लूट में अधिकतम हिस्सेदारी सुनिश्चित करवाना है. खुद के अच्छे आदमी होने का दंभ रखने वाले धन-साधन संपन्न कानपुर के एक ख़ास समूह ने राजनीति में प्रवेश या यूं कहें कि राजनीति पर नियंत्रण के इस अवसर को हाथोहाथ लिया है.
कानपुर आई.आई.टी. से पढ़े और बंगलुरु में आई. टी. व्यवसायी तथा वर्तमान में भाजपा की ‘गुड गर्वनेंस सेल’ के राष्ट्रीय संयोजक राजेन्द्र मिश्र और भाजपा के लिए विदेशों से धन मुहैया करवाने में विशेषज्ञता रखने वाले शेखर तिवारी ने विगत दिनों कानपुर में अपने नवगठित राजनीतिक दल “नव भारत पार्टी” के लिए संभावनाएं तलाशीं. मर्चेंट चैंबर हल में हुयी गुपचुप बैठक में राजेन्द्र मिश्र ने अपने उद्बोधन में अन्ना और रामदेव के आंदोलनों से मध्य-वर्ग के सरकार के विरुद्ध सामने आने को अपने लिए अवसर बताया. भाजपा की कर्नाटक सरकार के भ्रष्टाचार से उकताए श्री मिश्र ने कहा भाजपा अपना मूल चरित्र खो बैठी है और आपसी मतभेदों और विचारहीनता के चलते केंद्र में भ्रष्टतम कांग्रेस सरकार का विकल्प दे पाने में शहरी प्रबुद्ध मतदाताओं को प्रेरित नहीं कर पा रही है. उनके साथी शेखर तिवारी ने अपने उद्बोधन में पूरे देश में एक साथ विज्ञापन और दूसरे संचार-माध्यमों की मदद से पार्टी की नीतियों को धन के बल पर जन-जन तक पहुंचाने में अपनी सक्षमता का ब्योरा दिया.
मीटिंग में ही दबी जुबान अपना नाम सामने न लाये जाने की शर्त पर एक व्यवसायी ने कहा इस दल में कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा या विचारधारा का नहीं होना इनकी असफलता का बहुत बड़ा कारण होगा. इन दोनों का खुद कभी चुनावी राजनीति का अनुभव नहीं होना इन्हं कोरा कल्पनावादी बनाता है. उसने कहा कि ठोस जनाधारहीन इस दल का केवल धन के दम पर चुनाव जीतने का ख़्वाब सही नहीं है. निजी वार्ता में दूसरे व्यवसायी ने कहा काले धन के मैनेजर और सत्ता के दलालों के मुंह से नैतिकता का पाठ अच्छा नहीं. दूसरी तरफ श्री मिश्र के आह्वान पर झटपट सक्रिय सदस्यता लेने वाले कैप्टन सुरेश चन्द्र त्रिपाठी इस दल की नीतियों और इस दल के अगुआ से काफी मुतमईन दिखे. उन्होंने बताया इन दोनों का प्रयास काफी सराहनीय है. इनके साथ जुड़ने से राजनीति में काफी संभावनाएं रहेंगी. विशवस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि यही धनाढ्य समूह एक साथ कई नवगठित राजनीतिक दलों में अपनी राजनीतिक सम्भावनाएँ देख रहा है. दूसरे राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को राजनीतिक चन्दा देने वाले इस समुदाय में राजनीतिक अंकुश अपने हाथ में रखने की लालसा आम शहरी और गरीब तबके को क्या हक दिला पायेगा यह सवाल भविष्य के गर्भ में छुपा है क्योंकि इस समूह में ज्यादातर लोगों ने खुद कभी लोकतांत्रिक प्रणाली और मतदान करने में विशवास नहीं किया है.

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