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राजनीति में आई महिलाओं ने रंग बदलने में गिरगिट को भी मात दे दी है। कृष्णा तीरथ हो या फिर जयंती नटराजन जब मंत्री बन सारी सुख सुविधाओं का उपभोग कर रही थीं तब उन्हें कांग्रेस में कोई खोट नजर नहीं आया आज इन्हें पस्त हो रही कांग्रेस बहुत खराब नजर आ रही है। राहुल भैय्या को प्रधानमंत्री बनाने की मांग करने वालों में जयंती नटराजन भी थीं और अब अब राहुल उनके लिए बुरे हो गए। जयंती जी पब्लिक है सब जानती है। तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव पर आपकी नजर है और आप पर भाजपा की। जयाप्रदा हों या अनुराधा चौधरी या फिर शाजिया इल्मी इन सबको भाजपा एक ब्यूटी पार्लर नजर आ रही हैं जहां से इनकी खोयी रंगत फिर लौट सकती हैं। 32 सालों तक इंदिरा गांधी की कार उठवाने का तमगा ढोती रहीं किरण बेदी भाजपा के लिए बहुत जल्द ही बोझ बन गई हैं। दिल्ली के दंगल में किरण बेदी का मंगल भले ही हो पर दिल्ली का दिल एक बार फिर टूटेगा। सत्ता के गिद्ध भोज में नेताओं की नोंच घसोट में मुद्दे दम तोड़ रहे हैं। दिल् ली का चुनाव भविष्य की राजनीति की नींव रख रहा है। अवसरवादिता के नए नए कीर्तिमान बन रहे हैं जो इन कीर्तिमानों को तोड़ेगा वही आगे बढ़ेगा।

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