यह उस गांव के बच्चों की तस्वीर है जिस गांव की जिंदगी 24 घंटे भी नहीं बची है, घघरा की कल कल करती लहरों ने इस गांव की कुंडी खटखटा दी है। दोस्तों सिर्फ 24 घंटे में घघरा इसे लील जाएगी। लेकिन इस गांव के वाषिदों के चेहरे पर न तो कोई डर और न ही को

ई खौफ न ही कोई तैयारी। जब गांव कट जाएगा तो अपने बचे मवेषी और टूटे बर्तन लेकर कही और चले जाएगे। और जमीन को अपना बिस्तर और आसमान के षामियाने तले जिंदगी गुजर जाएगी षुक्र है अभी आसमान की प्लाटिंग नहीं हुई है। इसी गांव के बच्चों के साथ मेरी फोटो
यूपी में घाघरा और शारदा के बाद अब यमुना नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर गया है , जिससे राज्य के पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। यमुना नदी के अलावा घाघरा , शारदा और राप्ती नदियों का जलस्तर अभी भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश जारी है। बाराबंकी और बहराइच में घाघरा नदी के मुहाने बसे दर्जनभर गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है और लोग घरों की छतों और ऊंचाई वाली जगहों पर शरण लिए हुए हैं। सिंचाई विभाग के मुताबिक बहराइच के महसी , कैसरगंज और औरनानपारा तहसीलों के दर्जनभर गांव बाढ़ की चपेट में है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। विभाग के मुताबिक सिद्धार्थनगर में भी शोहरतगढ़ और नौगढ़ तहसीलों के दर्जनभर गांव बाढ़ की चपेट में हैं। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक यमुना नदी बलियां , गाजीपुर , इलाहाबाद , मिर्जापुर और वाराणसी में खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। युमना नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से कई जिलों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

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