यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन की नियुक्ति को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी तथा न्यायमूर्ति रामसूरत राम मौर्या की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मुद्दे पर निर्णय सुरक्षित कर लिया। कोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगी। वाराणसी के प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि आलोक रंजन करोड़ों के लैकफेड घोटाले में आरोपी है। इनके खिलाफ मुंबई की कोर्ट में आपराधिक मुकदमे की सुनवाई चल रही है। सीबीआई ने इनके खिलाफ चाजर्शीट दाखिल की है। ऐसे में दागी अधिकारी की मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए। यह जनहित में नहीं है।
alokप्रदेश के महाधिवक्ता वीसी मिश्रए अपर महाधिवक्ता अशोक पांडेय व अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मुख्य सचिव की नियुक्ति का मामला सेवाजनित है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेवा मामले को लेकर जनहित याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। साथ ही जनहित याचिका दायर करने के लिए हाईकोर्ट रूल्स के मुताबिक याची को कई घोषणाएं करनी होती हैए जिसका अनुपालन नहीं किया गया है। मुख्य सचिव के पक्ष में दलील दी गई कि लैकफेड घोटाले में दाखिल चाजर्शीट को मुंबई हाईकोर्ट ने रद कर दिया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उक्त प्रकरण हाईकोर्ट को नए सिरे से निर्णय को वापस कर दिया है। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मेहता ने पक्ष रखा और कहा कि याचिका पोषणीय है। जनहित में कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।

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