विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक समिति ने काली सूची में डाले गए 41 डीम्ड विश्वविद्यालयों में से सात को पूर्ण रूप से डीम्ड विश्वविद्यालय के दर्जे के अयोग्य ठहराया है, जबकि बाकी 36 विश्वविद्यालयों के बारे में कहा है कि उनके संसाधनों का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही उनके बारे में फैसला लिया जाएगा। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट यूजीसी की सलाह पर सहमति जताता है तो फिर इन सात विश्वविद्यालयों के लिए मुश्किल होगी।

यूजीसी सूत्रों के अनुसार पीएन टंडन समिति ने 2009 में 41 डीम्ड विश्वविद्यालयों को अयोग्य पाया था। आरोप था कि इन्हें पूर्व सरकार में बगैर जांच के डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। पूरा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। इस बीच, टंडन समिति की रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी की एक समिति ने अब इनमें से सात को पूर्ण रूप से अयोग्य बताया है। इनमें चार तमिलनाडु, दो हरियाणा तथा एक राजस्थान का विश्वविद्यालय है। इस संबंधी में यूजीसी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। उसके बाद अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को लेना है।

इन सात विश्वविद्यालयों में विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन सलेम, एकेडमी ऑफ मेरीटाइम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग,काराचूर, भारत इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च, चेन्नई, पी रामानुजम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, तंजावूर (सभी तमिलनाडु), महर्षि मरकडेश्वर यूनिवर्सिटी मुलाना, अंबाला  तथा मानव रचना इंटर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन, राजस्थान शामिल हैं। यूजीसी के सूत्रों के अनुसार यदि इन विश्वविद्यालयों डीम्ड विवि का दर्जा रद्द होता है तो उससे छात्रों को कोई नुकसान नहीं होगा बशर्ते की ये संस्थान पहले की भांति दूसरे विश्वविद्यालय से संबद्धता हासिल कर लें। बाकी विश्वविद्यालयों के मामले में यूजीसी भौतिक सत्यापन करेगी और उसके नतीजों के बाद तय करेगी कि किसका डीम्ड विवि का दर्जा बरकरार रखा जाए और किसका खारिज किया जाए।ugclogo~25~09~2014~1411661636_storyimage

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