शबाहत हुसैन विजेता
सहारा समय के संवाददाता एम.बी.हैदर का आज सुबह संजय गांधी अस्पताल (पीजीआई) में निधन हो गया। वह कैंसर से पीडि़त थे। अपने पीछे वह पत्नी और तीन बेटों को छोड़ गए हैं।
हैदर लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े थे। चैनल में आने से पहले वह सहारा इंडिया के टेलीफोन विभाग से सम्बद्ध थे लेकिन अपने काम के साथ-साथ उन्होंने पत्रकारिता से डिप्लोमा लिया और अखबार में मोहर्रम से सम्बन्धित खबरें लिखना शुरू किया। समाचार लेखन में दक्ष होने के बाद वह अखबार से स्थायी तौर पर जुड़ते उसी समय चैनल शुरू हो गया और उन्होंने अपना स्थानान्तरण चैनल में करा लिया। न्यूज चैनल में रहने के दौरान उन्होंने उल्लेखनीय काम किया और हमेशा चर्चा में बने रहे। हाल में बाबू सिंह कुशवाहा जेल से पीजीआई इलाज कराने आए थे तब सिर्फ एमबी हैदर ही थे जिन्हें इस बात का पता चला था। वह तुरन्त बाबू सिंह कुशवाहा का इंटरव्यू करने पहुंच गए थे। पीजीआई में कैंसर के एक डाक्टर से हैदर के अच्छे रिश्ते थे इस नाते वह उनके पास पहुंच गए। डाक्टर ने उनसे कहा कि तुम बड़ी खबर लेने आए हो लेकिन मुझे लगता है कि मेरे पास तुम्हारे लिए इससे भी बड़ी खबर है। बगैर जांच के ही उन्होंने हैदर को बता दिया कि मुझे शक है कि तुम्हें कैंसर हो गया है। तुरन्त जांच कराओ। उन्होंने हैदर को पीजीआई में ही रोक लिया और जांच करायी तो कैंसर की पुष्टिï हो गयी। कैंसर के इलाज के लिए हैदर मुम्बई भी गए लेकिन मुम्बई में उन्हें तत्काल कीमोथैरेपी की सलाह दी गयी। तब से वह लगातार कीमोथेरेपी करा रहे थे। हैदर ने कुछ दिन पहले खुद ही बताया था कि मैंने मौत को हरा दिया है। थोड़ी तकलीफ है जो धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। आज सुबह सारी तकलीफें खत्म हो गयीं और जिन्दगी हार गयी।
एम.बी.हैदर काफी खुशमिजाज इंसान था। 1993 से 2001 तक साथ काम करने की वजह से उसके बारे में यह बात पूरे यकीन के साथ कही जा सकती है कि वह जुझारू था और जो ठान लेता था करके छोड़ता था। जब उसने यह तय किया कि पत्रकार बनना है तब उसके साथियों ने उसकी हंसी उड़ायी थी लेकिन हैदर ने अपनी मेहनत के बल पर हंसी उड़ाने वालों को करारा जवाब दिया था और अपने न्यूज चैनल के जरिये यह साबित कर दिया था कि मेहनत के बल पर कोई भी अपना मुकाम हासिल कर सकता है।
न्यूज चैनल से जुडऩे से पहले हैदर ने अपनी नौकरी के साथ-साथ वीडियो कैमरे के जरिये तमाम शादियां कवर की थीं। तब लोग समझते थे कि हैदर ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में लगा हुआ है लेकिन तब हैदर लगातार वीडियो बनाकर कैमरे की भाषा को समझने की कोशिश कर रहा था। 1998 आते-आते हैदर कैमरे को इतनी अच्छी तरह से समझने लगा था कि शादियों में अपने जूनियर को भेजता था लेकिन कुछ खास शाट्स लेने के लिए खुद जाता था। कैमरे की भाषा को अच्छी तरह से समझ लेने के बाद ही उसने तय किया था कि वह इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिये अपना काम करेगा। सचाचार लेखन में दक्ष होने की वजह से उसने फोटोग्राफर बनने के बजाय संवाददाता बनना तय किया था लेकिन अपनी खबरों के लिए कैमरे का एंगिल भी वह खुद तय करता था।
अपनी मेहनत के बल पर अपना मुकाम बनाने वाला एम.बी.हैदर कम वक्त में ही पत्रकारिता जगत का चर्चित चेहरा बन गया था। हर काम को मंजिल तक पहुंचा देने का फन जानने की वजह से ही हैदर ने पन्द्रह बीस दिन पहले मुस्कुराते हुए कहा था कि मैंने कैंसर को हरा दिया है। मैंने मौत को हरा दिया है। थोड़ी परेशानी है, कुछ दिन में वह भी ठीक हो जाएगी। अभी तो बहुत काम करने हैं। मुस्कुराता हुआ हैदर आज सुबह अचानक खामोश हो गया। उसका आत्मविश्वास आज पूरी तरह से हार गया। जिन्दगी धोखा देकर चली गयी। कम उम्र में ही हैदर ने मौत को गले लगा लिया। हैदर को पिछले कई साल से पान मसाला खाने का शौक था। हर वक्त मुंह मसाले से भरा रहता था। वह बड़े फख्र से बता रहा था कि पीजीआई गया था तब भी गेट पर ही मसाला थूका था। कभी महसूस ही नहीं हुआ कि ऐसी बीमारी भी पकड़ सकती है। खैर छोड़ो। अब मसाला छोड़ दिया है। बीमारी भी छोड़ ही देगी।
हैदर को पता नहीं था कि बीमारी उसे छोड़कर जाने के लिए नहीं बल्कि उसे साथ लेकर जाने के लिए आयी थी। मौत को हरा पाना किसी के बूते की बात नहीं होती है। हैदर भी मौत से हार गया है।

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