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लखनऊ की एक अदालत ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को टेलीफोन पर धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सोम प्रभा ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत ठाकुर की अर्जी को मंजूर करते हुए 14 सितंबर को दिए अपने आदेश में हजरतगंज थानाध्यक्ष से कहा कि वह उचित धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज कर कानून सम्मत पड़ताल करें और पूरी कार्यवाही कोर्ट को बताएं। अदालत ने माना कि अमिताभ ठाकुर द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों का अध्ययन करने से पता लगता है कि यह मामला भारतीय दंड विधान की धारा 506 (धमकाने) के तहत आता है। गौरतलब है कि आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सपा के मुखिया पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा दस जुलाई को फोन पर दी गई धमकी के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए 11 जुलाई को हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी थी। ठाकुर ने यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने पर 22 जुलाई को लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय को भी प्रार्थनापत्र भेजा था। इसके पूर्व 17 जुलाई को लिखे पत्र के जरिये हजरतगंज के कोतवाल विजयमल यादव ने ठाकुर को सूचित किया था कि उनकी शिकायत की जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। तब ठाकुर ने इस जांच को कानून के खिलाफ बताते हुए 31 जुलाई को धारा 156(3) के तहत मुलायम सिंह यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश देने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। सपा मुखिया के खिलाफ हजरतगंज थाने पर प्राथमिकी की तहरीर देने के बाद ठाकुर के विरूद्ध गाजियाबाद की एक महिला की तरफ से बलात्कार की प्राथमिकी दर्ज करा दी गई थी, जिसको लेकर ठाकुर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से सीबीआइ जांच की मांग की थी और उसके बाद 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन से पहले पुलिस महानिरीक्षक (नागरिक सुरक्षा) के पद पर तैनात रहे ठाकुर को सरकार ने निलंबन के बाद 200 पृष्ठों का आरोपपत्र दिया था और उनके खिलाफ सतर्कता विभाग से जांच के आदेश दे दिये थे, जो चल रही है।

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