केन्द्र व्यवस्थापक निजी स्कूलों में बने केन्द्रों पर ड्यूटी करने से हटे पीछे, नकल माफिया के दबाव से जोडक़र देखा जा रहा प्रकरण राजधानी में यूपी बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन बनाने की कोशिशों को झटका लगा है। करीब 25 फीसदी केन्द्र व्यवस्थापकों ने परीक्षा कराने से इनकार कर दिया है। दस से ज्यादा के प्रार्थना पत्र गुरुवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में आए हैं। इन्हें निजी स्कूलों में बने केन्द्रों पर केन्द्र व्यवस्थापक की जि मेदारी दी गई थी। ड्यूटी न करने के सबने अपने-अपने कारण है। हालांकि, जानकार इस पूरे प्रकरण को निजी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा में होने वाली नकल और उसके लिए नकल माफियाओं के दबाव से जोडक़र देखा जा रहा है। इस बार की बोर्ड परीक्षाओं में नकल पर कंट्रोल करने के लिए निजी स्कूलों में बने केन्द्रों पर बाहर से केन्द्र व्यवस्थापक तैनात किए गए हैं। ये राजकीय और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक हैं। राजधानी में 40 निजी स्कूलों को केन्द्र बनाया गया है।

बोर्ड के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने बुधवार को ड्यूटी की सूची जारी की गई। लेकिन गुरुवार को ही शिक्षकों ने ड्यूटी करने से इनकार कर दिया है। राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज के एक शिक्षक को सरस्वती विद्या मंदिर इंदिरानगर में केन्द्र व्यवस्थापक बनाया गया है। उनकी ओर से डीआईओएस को पत्र लेकर कहा कि उन्हें बोर्ड परीक्षा कराने का कोई अनुभव नहीं है इसलिए यह जि मेदारी न दी जाए। डीआईओएस पीसी यादव ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। नियमानुसार कार्रवाई कर सभी केन्द्रों पर परीक्षाएं सुनिश्चित कराई जाएंगी। (बॉक्स) प्रश्न पत्रों का वितरण शुरू : राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में गुरुवार को प्रश्न पत्रों को वितरण शुरू कर दिया गया। पहले दिन 40 केन्द्रों के केन्द्र व्यवस्थापकों को प्रश्न पत्र दिए गए। डीआईओएस ने साफ किया है कि प्रश्न पत्र प्राप्त करने के लिए निजी स्कूलों में बने केन्द्रों के केन्द्र व्यवस्थाक का मौजूद होना अनिवार्य है।

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