mayawati_mulayamकिसी ने सच ही कहा है कि मित्रता और शत्रुता राजनीति में कभी स्थायी नहीं होती। पहले अमर सिंह को पार्टी में वापस ला कर फिर लालू से नजदीकियां बढ़ा कर मुलायम सिंह यादव ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में उनसे चतुर खिलाड़ी कोई नहीं है। अब मुलायम सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती से भी दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहते हैं। उन्हें यह अच्छी तरह मालूम है कि सपा यूपी में फिर सत्ता में लौटने वाली नहीं। अखिलेश को सत्ता सौंप कर नेता जी एक दिन भी चैन से नहीं बैठ पाए हैं। अफसर बेकाबू और मंत्री बेलगााम हो ते जा रहे हैं जिससे सपा का लनाधार तेजी से नीचे गिरता जा रहा है।
लालू नीतीश कांग्रेस के गठबंधन के बाद अब मुलायम ने यूपी में अपनी साख बचाने के लिए नया पैंतरा खेला है। मुलायम ने कहा है कि वो मायावती से हाथ मिलाने को तैयार हैं अगर लालू मध्यस्थता करें। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनावों में बीएसपी को एक भी सीट नहीं मिली थीए जबकि समाजवादी पार्टी सिर्फ 5 सीटों पर सिमट कर रह गई हैए साफ है मुलायम मायावती से हाथ मिलाकर बीजेपी से मुकाबला करना चाहते हैं और उसके लिए वो किसी मददगार की तलाश कर रहे हैं।
2 दिन पहले ही जब लालू और नीतीश एक साथ एक मंच पर आए थे तो लालू ने कहा था कि बीजेपी को हराने के लिए सभी पार्टियां साथ आएं। उन्होंने कहा था कि यूपी में मुलायम सिंह और मायावती को भी साथ मिल जाना चाहिए इसी के जवाब में आज मुलायम ने कहा कि अगर लालू खुद मायावती को लेकर आएं तो वो मायावती से दोस्ती करने को तैयार हैं।
मुलायम ने कहा कि अगर लालू मायावती का हाथ पकडक़र ले आए तो उन्हें मायावती से गठबंधन में कोई दिक्कत नहीं है। गौरतलब है कि बिहार के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का मुकाबला करने के लिए सालों के धुर विरोधी रहे लालू और नीतीश एक साथ मिल गए हैं। ऐसे में लालू ने यूपी में भी मुलायम और मायावती को साथ आने की नसीहत दे डाली।

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