Hani-be5जी हां आप यदि रोजगार चाहते हैं तो मधुमक्खी पालन उद्योग इसमें उनकी भरपूर मदद कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों से न सिर्फ लोगों का रुझान इसकी तरफ बढ़ा है, बल्कि खादी ग्राम उद्योग भी अपनी तरफ से कई सुविधाएं प्राप्त करा रहा है। मधुमक्खी पालन एक लघु व्यवसाय है, जिससे शहद एवं मोम प्राप्त होता है। यह एक ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पर्याय बनता जा रहा है। फिलहाल शहद उत्पादन के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है।
मधुमक्खी पालन से संबंधित कई तरह के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा अथवा डिग्री कोर्स किए जा सकते हैं। डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थी के लिए साइंस स्ट्रीम से स्नातक होना जरूरी है, जबकि हॉबी कोर्स के लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं होती। प्रशिक्षण के लिए एक हफ्ते से लेकर 9 महीने तक का कोर्स उपलब्ध है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो इस व्यवसाय में दिलचस्पी रखता हो, वह भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क फीस 500 से लेकर 4000 रुपए तक है।
मधुमक्खी के प्रकार
इस व्यवसाय के लिए चार तरह की मधुमक्खियां इस्तेमाल होती हैं। ये हैं- एपिस मेलीफेरा, एपिस इंडिका, एपिस डोरसाला और एपिस फ्लोरिया। इस व्यवसाय के लिए एपिस मेलीफेरा मक्खियां ही अधिक शहद उत्पादन करने वाली और स्वभाव की शांत होती हैं। इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है।
जरूरी सामान
मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्सफ्रेम, मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद, रिमूविंग मशीन, शहद इक_ा करने के ड्रम का इंतजाम जरूरी है।
बचाव
जहां मधुमक्खियां पाली जाएं, उसके आसपास की जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए। बड़े चींटे, मोमभझी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू मधुमक्खियों के दुश्मन हैं, इनसे बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए।
वातावरण
यह एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे यदि किसी फूलवाली फसल के साथ किया जाए तो उसमें 20 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है। पश्चिमी देशों में बढ़ती मांग को देखते हुए मधुमक्खी पालन की बुआई वाले क्षेत्रों में अच्छी-खासी संभावनाएं हैं। इसके अलावा, सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपीलेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेडमें जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेडमें वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता है।
कब शुरू करें
मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, लेकिन नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए वरदान है।
आय और व्यय
आमतौर पर पचास डिब्बे वाली इकाई पर करीब दो लाख रुपए तक की लागत आती है, जिसमें डिब्बे खरीदने और उपकरणों का खर्च भी शामिल है। इस इकाई पर खर्च करके तीन से चार लाख रुपए कमाए जा सकते हैं।
सरकार से ऋण-व्यवस्था
पिछले कुछ वर्षों में मधुमक्खी पालन की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। इस उद्योग के लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन सुविधा उपलब्ध करवाई है। इस व्यवसाय के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक का लोन उपलब्ध है, चूंकि यह उद्योग लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है।
अवसर
मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण के बाद सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में काफी संभावनाएं हैं। गैर-सरकारी संस्थानों में जैसे सुप्रसिद्ध कंपनी डाबर, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में बी कीपिंग ट्रेड की नौकरी के लिए समय-समय पर विज्ञापन निकलते रहते हैं।
वेतनमान
इस व्यवसाय से जुड़े सरकारी कर्मचारियों का वेतनमान सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है, जबकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों में डिग्रीधारकों को पद के हिसाब से 30 से 50 हजार रुपए तक मिलते हैं।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.