Prime Minister Narendra Modi with President of China Xi Jinpingफोर्तालेजा (ब्राजील)। प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के समाधान पर जोर देते हुए कहा कि यदि इसका सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल लिया जाए तो यह दुनिया के लिए विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का एक उदाहरण होगा। शी जिनपिंग ने मुलाकात के दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा में भारतीयों के लिये एक और रास्ता खोलने के अलावा कई अन्य फायदेमंद प्रस्ताव रखे। श्री जिनपिंग ने कहा कि चीन भारत के लिये हानिकारक विपरीत व्यापार संतुलन को हटाने का प्रयास करेगा। इसके अलावा चीन ने पहली बार भारत को यह संदेश दिया कि वह शंघाई सहयोग संगठन में उसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखना चाहता है। मोदी और शी के बीच बैठक 40 मिनट चलनी थी, पर दोनों नेता 80 मिनट तक साथ बैठे। इसमें दोनों के बीच तमाम मुद्दों पर बिना किसी दिक्कत के खुलकर बातें हुर्इं। मोदी ने चीनी नेता के साथ हुई बैठक के बाद ट्विटर पर अपने संदेश में कहा चीन के राष्ट्रपति के साथ बड़ी सफल बैठक हुई। हमने तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
भारत में नयी सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच हुई पहली उच्च स्तरीय मुलाकात में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने श्री मोदी के न्योते को स्वीकार करते हुये आगामी सितंबर में भारत के दौरे पर आने का वादा किया है। इस मुलाकात के बाद चीन ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामान्य एजेंडे को आगे बढ़ाने के उद्देश्य के लिये भारत की नयी सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जाहिर की है। श्री मोदी और श्री जिनपिंग की मुलाकात को द्विपक्षीय संबंधों के लिये अच्छा माना जा रहा है। श्री मोदी ने मुलाकात में भारत और चीन के बीच के असंतुलित व्यापार का मुद्दा उठाया जिसके बाद श्री जिनपिंग ने कहा कि वह भारत की चिंता को समझते हैं और इसके निदान के लिये सेवा क्षेत्र में व्यापार बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने साथ ही कहा कि अधिक संख्या में चीनी पर्यटक भारत भ्रमण के लिये आ सकते हैं। इसी सिलसिले में श्री मोदी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये अतिरिक्त रास्ता देने की बात की जिसे चीन ने स्वीकार कर लिया।
श्री मोदी ने श्री जिनपिंग के समक्ष चीन और भारत के बीच विवादित सीमा का मुद्दा भी उठाया और सीमा पर शांति बहाल करने के लिये इसे हल करने की जरूरत पर बल दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने बैठक के बारे में मीडिया को बताते हुये कहा, बैठक में दोनों नेता गर्मजोशी से मिले और यह मुलाकात भारत और चीन दोनों के लिये फायदेमंद साबित हुई है।दोनों नेता काफी तैयारी से गये थे जिसके कारण उनके बीच काफी अच्छी बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने आतंकवाद पर चर्चा की और श्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन को इस मसले पर साथ काम करना चाहिये। बैठक के शुरू होते ही श्री मोदी ने श्री जिनपिंग से राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले दिये गये उनके भाषण पर चर्चा की जिस पर श्री जिनपिंग ने गुजरात के मुख्यमंत्री होने के दौरान दिये गये श्री मोदी के भाषणों का उल्लेख किया।
उल्लेखनीय है कि शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना होने से पहले ही श्री मोदी ने भारत के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक एजेंडों के बारे में मीडिया को बताया था। श्री मोदी क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय भूमिका के लिये ब्रिक्स के मंच का उपयोग करने के नजरिये से सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। वह ब्रिक्स देशों के अलावा लातिन अमेरिकी देशों के साथ संबंधों को नये मायने देने के इरादे से सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य राष्ट्र 100 अरब डालर की भारी भरकम राशि के साथ विकास बैंक की स्थापना के लिये राजी हो गये हैं लेकिन बैंक के मुख्यालय और इसके प्रमुख के सवाल पर सभी अपनी अपनी जगह अड़े हैं। अगर विकास बैंक के गठन में इस विवाद के कारण देर होती है तो ब्रिक्स देश संभव अभी छठे शिखर सम्मेलन में सिर्फ इसके गठन के लिये सहमति देंगे और इसके मुख्यालय तथा प्रमुख के मामले पर बाद की बैठक में चर्चा होगी और तब ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जायेगा।

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