लंदन, 20 फरवरी :भाषा: वैज्ञानिकों ने भारत पर मलेरिया के ऐसे परजीवियों के खतरे की चेतावनी दी है, जो दवा-प्रतिरोधी हैं। ए परजीवी म्यांमा-भारत सीमा के पास पाए गए हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि भारत में आर्टेमिसिनिन दवा के प्रतिरोधक परजीवियों का प्रसार मलेरिया पर वैश्विक नियंत्रण एवं उन्मूलन प्रयास के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगा। उन्होंने कहा, ”यदि दवा प्रतिरोधकता एशिया से अफ्रीकी उप-महाद्वीप की ओर फैल जाती है या अफ्रीका में स्वतंत्र तौर पर पैदा हो जाती है :जैसा कि पहले भी हो चुका है: तो लाखों जिंदगियों पर खतरा पैदा हो जाएगा।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और माहिडोल-ऑक्सफोर्ड ट्रॉपिकल मेडिसिन रिसर्च यूनिट के डॉक्टर चाल्र्स वूडरो ने कहा, ”म्यांमा को आर्टीमिसिनिन प्रतिरोधकता से लड़ाई में सबसे अग्रिम मोर्चे पर माना जाता है क्योंकि यह इस प्रतिरोधकता के शेष विश्व में फैलने का रास्ता बनाता है। वेलकम ट्रस्ट में संक्रमण एवं प्रतिरोधकता मामलों के प्रमुख प्रोफेसर माइक टर्नर ने कहा, ”दवा प्रतिरोधी मलेरिया परजीवियों की उत्पत्ति 1960 के दशक में दक्षिणपूर्वी एशिया में हुई और वहां से यह म्यांमा से भारत में और फिर शेष दुनिया में फैल गया और इसने लाखों लोगों की जिंदगियां लील ली। टर्नर ने कहा, ”नया शोध दर्शाता है कि मलेरिया के आधुनिक इलाज के प्रमुख आधार यानी आर्टीमिसिनिन दवाओं की प्रतिरोधकता के मामले में इतिहास खुद को दोहरा रहा है और यह इस समय म्यांमा में व्यापक स्तर पर है। इस प्रतिरोधकता के भारत में फैल जाने और हजारों जिंदगियों के जोखिम में पडऩे का खतरा है।

 

 

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