suvir-mirchandani_295x200_81396157686अमेरिका आज विकास की राह पर औरो से आगे हैं। अमेरिका की तरक्की में भारतीयों का योगदान ज्यादा है। भारतीय मूल के 14 साल के एक छात्र ने अमेरिका के सामने एक ऐसी योजना पेश की है जिससे आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल किए जाने वाले फॉन्ट को बदल देने मात्र से ही हर साल लगभग 40 करोड़ डॉलर की राशि बचाई जा सकती है। पिट्सबर्ग क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल में पढऩे वाले सुवीर मीरचंदानी ने दावा किया कि यदि संघीय सरकार गारमोंड फॉन्ट का इस्तेमाल करती हैए तो यह विशेष तौर पर सालाना करीब 13ण्6 करोड़ डॉलर की बचत कर सकती हैए जो स्याही पर सालाना खर्च होने वाले अनुमानित 46ण्7 करोड़ डॉलर से 30 प्रतिशत कम है। यदि राज्य सरकारें भी इस बदलाव को कार्यान्वित करती हैंए तो 23.4 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि बचाई जा सकती है। मीरचंदानी ने कहा कि उसके मन में यह विचार तब आयाए जब वह अपने स्कूल में विज्ञान मेला परियोजना के तहत व्यर्थ खर्च में कटौती करने और धन बचाने की सोच रहा था। उसने अपने प्रयोग के तहत शिक्षकों के हैंडआउट्स के बिना बारी के रैंडम नमूने लिए और आम तौर पर सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले ईए टीए ए तथा आर जैसे अक्षरों पर ध्यान केंद्रित किया।

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