ngpकल्पतरु एक्सप्रेस लखनऊ के वरिष्ठ संवाददाता नागेन्द्र सिंह चौहान जी की विशेष रिपोर्ट
भाजपा की घेराबंदी पर मुलायम सिंह यादव के आजमगढ़ से लडऩे भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेरने के लिए सपा मुखिया ने खुद आजमगढ़ से लडऩे का फैसला किया है। भाजपा ने उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची से जाहिर कर दिया था कि वह सपा को उसी के गढ़ में घेरने की तैयारी में है। भाजपा ने अपने पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को वाराणसी से उतारकर सपा को ‘मैसेजÓ भी देदिया। भाजपा ने मोदी की उम्मीदवारी के बहाने पूर्वांचल की 30 सीटों को प्रभावित करने का लक्ष्य साधा है। वहीं, अब भाजपा को रोकने के लिए मुलायम सिंह यादव खुद मैदान में आ गए हैं।
पहलवानी का शौक रखनेवाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव कभी-कभी राजनीति में भी ‘चरखा दांवÓ खेल जाते हैं। उनका अपनी परंपरागत सीट मैनपुरी के साथ आजमगढ़ से भी चुनाव लडऩा इसका ताजा उदाहरण है। उनकी आजमगढ़ से उम्मीदवारी से दो बातें साफ हो गई हैं। एक- समाजवादी पार्टी भाजपा से सीधी जंग लड़ेगी। दो- सपा पूर्वांचल में लोकसभा की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपना हक जताएगी। उल्लेखनीय है कि सपा व भाजपा के बीच कई महीने से ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पातÓ जैसी जंग चल रही है। कभी किसकी रैली में कितनी भीड़ तो कभी यूपी व गुजरात के विकास की तुलना हुई। मोदी व मुलायम ने एक-दूसरे का सीना मापने की भी कवायद की।
पूर्वांचल की तीस सीटों को लेकर भाजपा शुरू से बहुत गंभीर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले गोरखपुर व वाराणसी में मोदी की रैली प्राथमिकता के आधार पर कराई गई। इसके बाद वाराणसी से मोदी को प्रत्याशी बना दिया गया। इसी कड़ी में भाजपा ने देवरिया से पार्टी के कद्दावर नेता सूर्य प्रताप शाही के बजाय कलराज मिश्र को टिकट दिया। भाजपा को रोकने के लिए सपा भी बराबर जतन कर रही है। सपा ने मोदी की उम्मीदवारी का एलान होते ही पैंतरा बदल दिया। कुछ घंटों बाद ही मुलायम सिंह यादव के आजमगढ़ से लडऩे का एलान हो गया। दरअसल, सपा ने विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की तकरीबन 125 सीटों में से 75 सीटों पर जीत हासिल की थी। वह पूर्वांचल में अपेक्षित संख्या में लोकसभा सीटें जीतने की मंशा रखती है। मुलायम की आजमगढ़ से उम्मीदवारी इस मंशा को खुलकर प्रदर्शित करती है। सपा के लिए आजमगढ़ सीट बेहद सुरक्षित मानी जा रही है। वहां विधानसभा चुनाव में भी सपा को जबरदस्त सफलता मिली थी। लोकसभा के सभी समीकरण सपा के पक्ष में दिखाई पड़ते हैं। आजमगढ़ से मुलायम के चुनाव लडऩे का मकसद पूर्वांचल में सपा का टैम्पो हाई रखना है।
बहरहाल, आजमगढ़ से मुलायम और वाराणसी से मोदी की उम्मीदवारी से पूर्वांचल की चुनावी जंग बहुत दिलचस्प हो गई है। इसकी गूंज प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सुनाई देगी। मजेदार बात यह रहेगी कि इन दोनों शूरमाओं की जंग चुनाव के अंतिम दौर तक जारी रहेगी, क्योंकि दोनों स्थानों पर छठे चरण में मतदान होगा।

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