कमलेश श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से साभार

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सरकारी कर्मचारियों के लिए एक और खुश खबरी। काम न करने के दिनों में एक और इजाफा। 17 अप्रैल को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर जी के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश होगा। गर्व से सीना न फुलाइए। यह वह चन्द्रशेखर नहीं हैं जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपनी जान दी थी। अरे यह वह चन्द्रशेखर भी नहीं हैं जिन्होंने अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे। यह वह चन्द्रशेखर हैं जिन्होंने कांग्रेस के भरोसे कुछ महीने खुद प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा किया था। बिना कोई मंत्री बने सीधे प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने जनता दल परिवार के कई सदस्यों के सपनों पर पानी फेर दिया था। चौधरी चरण सिंह, कर्पूरी ठाकुर फिर चन्द्रशेखर की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश के बाद अगर पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के नाम पर भी सार्वजनिक अवकाश हो तो कोई आश्चर्य नहीं। देश के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले नेता जी सुभाष चन्द्र बोस राजनीति में नेताओं से कहीं पीछे छूट गए हैं। 24 जनवरी को प्रदेश सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कर्पूरी ठाकुर के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया है वहीं एक दिन पहले यानी 23 जनवरी को होने वाली नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर कोई अवकाश नहीं होता।
राजनीतिक अवसरवादिता की मिसाल रहे पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर सार्वजनिक अवकाश के हकदार बने । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन पड़ता है इसलिए उनके जन्मदिन पर स्वत:सार्वजनिक अवकाश होता है। अगर लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन दो अक्टूबर के दिन न पड़ता तो वह भी सार्वजनिक अवकाश के सम्मान के दायरे में नहीं आ पाते। शास्त्री जी तो गांधी जी के साथ किसी तरह एडजस्ट हो गए पर अन्य प्रधानमंत्री चाहे वह जवाहरलाल नेहरू या हों या फिर इंदिरा गांधी सार्वजनिक अवकाश का सम्मान नहीं पा सके।
वोटबैंक की राजनीति और जातीय जंगल में लोहिया के आदर्श गुम हो गए तो बिहार से कोई नाम आया तो वह भी सिर्फ कर्पूरी ठाकुर का। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के नाम पर भी कोई सार्वजनिक अवकाश नहीं होता। सम्पूर्ण क्रांति के लोकनायक जयप्रकाश के नाम पर भी सार्वजनिक अवकाश नहीं है। यह दोनों नेता आज के राजनीतिक दलों के वोटबैंक के खांचे में फिट नहीं बैठते। जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति से उपजे नेताओं को भले ही सार्वजनिक अवकाश का सम्मान दिया जा रहा हो पर लोकनायक की उपेक्षा नए जनता दल परिवार के लिए भारी पड़ सकती है। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को मोदी सरकार भारत रत्न दिलाने में कामयाब नहीं रही लेकिन प्रदेश सरकार के पास मौका था कि वह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर सार्वजनिक अवकाश कर मोदी सरकार से एक कदम आगे बढ़ सकती थी। लेकिन ऐसा हो न सका। स्वामी विवेकानन्द और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की अनदेखी कर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चन्द्रशेखर स्व. चौधरी चरण सिंह व कर्पूरी ठाकुर जी के जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश का सम्मान देना जनता ध्यान से देख रही है। माना कि लडक़ों से गलतियां हो जाती है लेकिन बड़ों की चूक को जनता हलके में नहीं लेती…सुन रहे ना नेता जी।

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