कभी-कभार ही ऐसा होता है कि अचानक किसी ऐसे मसाले का सुराग हाथ लगता है, जिसकी निराली पहचान और खास जायका उसे असाधारण रूप से आकर्षक बना देता है। ऐसा ही एक खास मसाला है नागपुरी सावजी मसाला। सूखी या तरी वाली सब्जियों में इस खास मसाले का उपयोग करने के लिए भोजन भट्ट उतावले रहते हैं। नागपुर यात्रा के दौरान वहां का मशहूर ‘सावजी’ खाना खिलाने हमारे मेजबान हमें ले गए, तब से हम इस पक्के रंग वाले मसाले के दीवाने हो गए।

मसाले का रहस्य खोलने से पहले इस पेशेवर खाना पकाने वाले समुदाय के बारे में कुछ जानकारी साझा करनी जरूरी है। हथकरघे पर पुरुषों की धोतियां और महिलाओं की साडि़यां बुनने वाले इन कारीगरों ने फैशन में आते बदलाव के बाद जीविका के लिए यह व्यवसाय अपनाया। यहां यह भी याद दिलाने की जरूरत है कि नागपुर विदर्भ का दिल है। भले ही भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के वक्त उसे महाराष्ट्र में जोड़ दिया गया, मगर कभी इस रियासत की सरहद हैदराबाद तक पहुंचती थी और वीर मराठों का शासन संबलपुर-कटक तक फैला था। मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल के जायके भी अनजान नहीं थे।

सावजी मसाला गरम मसालों का खास मिश्रण है जिसके नुस्खे में घर-घर का थोड़ा कुछ फर्क होता है। इसमें लौंग, काली मिर्च, मोटी इलायची, तेजपात, दालचीनी, जावित्री-जायफल के साथ ही काफी मात्रा में स्थानीय बिहुपुरी लाल मिर्च होती है। इस मिश्रण में खोपरा अनिवार्यत: डाला जाता है। तिल, खसखस के बीज और मूंगफली इसे अलग पहचान देते हैं। साथ ही तवे पर कोरा या हल्के तेल के साथ भुना लहसुन इसमें जान डालता है। विदर्भ के इलाके में कड़ी गर्मी पड़ती है और लहसुन तथा प्याज की तासीर गर्मी का कष्ट दूर करने वाली होती है। इस मसाले में दक्षिण भारत की पोडियों की तरह भुने चने या नाममात्र चावल और दाल के कुछ दाने भी शामिल किए जाते हैं।

इस मसाला मिश्रण को तीन तरह से तैयार किया जाता है- एक तो, पीसने के पहले तवे पर सभी चीजों को भूना जा सकता है। दूसरा, इन्हें पीसने से पहले तेल में हल्का तला जाता है, तीसरा तरीका, (यही तरीका सर्वश्रेष्ठ है!) पीसने के पहले सभी चीजों को एक साथ उबाल-छानकर पीसा जाता है। बचे पानी को व्यंजन में शोरबा के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।अनुभव से मिलता कौशलसावजी मसाले का चमत्कार ताजा पिसे मसाले का ही कमाल है। इसके साथ ही किस अनुपात में मिर्च तथा दूसरे मसालों को संतुलित करना है, यह कौशल अनुभव से हासिल होता है। शादी-ब्याह में सावजी रसोई के व्यंजन चखेंगे तो उनमें तेल की मात्रा अधिक होगी, घर पर ऐसा नहीं होता है।

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