बुलेट ट्रेन फ़िलहाल हम भारतीयों के लिए अपने किसी सपने जैसा है क्योंकि जितना इंफ्रास्ट्रक्चर बुलेट ट्रेन को दौड़ाने के लिए चाहिए उसको जुटाने में दो – चार नहीं दस – बीस वर्ष लग जायेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद जब मोदी गुजरात भवन में रह रहे थे तभी उन्होंने रेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बुलेट ट्रेन पर विमर्श आरंभ कर दिया था और बजट में घोषणा भी कर दी गई। जापान यात्रा के दौरान इस सम्बन्ध में समझौता भी कर लिए गया। बुलेट ट्रेन को निजी एवं सार्वजनिक भागीदारी [पीपीपी] पर हकीकत का जामा पहनाने से पहले इस सम्बन्ध में भी विचार किया जाना जरूरी है कि हजारों करोड़ का खर्च करके जब ये प्रोजेक्ट पूरा होगा तो यात्रियों को किराए के रूप में निश्चित रूप से बड़ी धनराशि खर्च करनी होगी। जब यात्री को बुलेट ट्रेन में यात्रा करने को सामान्य से अधिक पैसे खर्चने होंगे तो वह हवाई यात्रा पर क्यों नहीं खर्च करेगा। देश में बुलेट ट्रैन का दौड़ना देशवासियों के लिए गर्व की बात तो होगी लेकिन मेरा मानना है बुलेट ट्रेन के सापेछ विमानन छेत्र को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि सस्ती हवाई यात्रा का मौका जनता को मिल सके.arpit

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