मशहूर पत्रकार खुशवंत सिंह का 99 साल की उम्र में निधन हो गया है। 2 फरवरी 1915 को जन्मे खुशवंत अपना जीवन जिंदादिली से जीते रहे। खुशवंत ने पारंपरिक तरीका छोड़ नए तरीके की पत्रकारिता की थी। khushwant-singh-20
जिस उम्र में लोग बिस्तर से उठ नहीं पाते हैं उस उम्र में भी खुशवंत सिंह की जिंदादिली युवाओं को भी मात देती थी। क्या मजाल कलम की रफ्तार कम पड़ी हो कभी। उनकी लेखनशैली में बिल्कुल अलग थी। किसी भी विषय पर कुछ भी लिख सकते थे वे।
खुशवंत जितने भारत में लोकप्रिय थे उतने ही पाकिस्तान में भी लोकप्रिय थे। उनकी किताब ट्रेन टू पाकिस्तान बेहद लोकप्रिय हुई। इस पर फिल्म भी बन चुकी है। खुशवंत पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किए जा चुके हैं।
खुशवंत सिंह का जन्म 2 फ़रवरी, 1915, हदाली, पंजाब में हुआ था। वो एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार और इतिहासकार थे। एक पत्रकार के रूप में इन्होंने बहुत लोकप्रियता मिली ‘भारत सरकार’ के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के सम्माननीय पद पर भी खुशवंत सिंह जी ने काम किया है।
उन्हें 1974 पद्म भूषण और 2007 में ‘पद्म विभूषण’ से भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका था। खुशवंत सिंह ने कई अमूल्य रचनाएं अपने पाठकों को प्रदान की हैं। खुशवंत सिंह के पिता का नाम सर सोभा सिंह था, जो अपने समय के प्रसिद्ध ठेकेदार थे। उस समय सोभा सिंह को आधी दिल्ली का मालिक कहा जाता था।
खुशवंत सिंह जी ने ‘गवर्नमेंट कॉलेज’, लाहौर और ‘कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी’ मंक शिक्षा पाई थी। इसके बाद लंदन से ही क़ानून की डिग्री ली। उसके बाद तक वे लाहौर में वकालत करते रहे। खुशवंत सिंह जी का विवाह कंवल मलिक के साथ हुआ। इनके बेटे का नाम राहुल सिंह और पुत्री का नाम माला है।
एक पत्रकार के रूप में भी खुशवंत सिंह जी ने अच्छा नाम अर्जित किया और पत्रकारिता में बहुत ख्याति अर्जित की। 1951 में वो आकाशवाणी से जुड़े थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र ‘योजना’ का संपादन किया। मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साप्ताहिक ‘इल्लस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया’ के और ‘न्यू डेल्ही’ के संपादक वे 1980 तक थे।
1983 तक दिल्ली के प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के संपादक भी वही थे। तभी से वो प्रति सप्ताह एक लोकप्रिय ‘कॉलम’ लिखते हैं, जो अनेक भाषाओं के दैनिक पत्रों में प्रकाशित होता है। खुशवंत सिंह उपन्यासकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में विख्यात हैं। उनके अनेक उपन्यासों में प्रसिद्ध हैं- ‘डेल्ही’, ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’, ‘दि कंपनी ऑफ़ वूमन’ ।
वर्तमान संदर्भों और प्राकृतिक वातावरण पर भी उनकी कई रचनाएं हैं। दो खंडों में प्रकाशित ‘सिक्खों का इतिहास’ उनकी प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है। साहित्य के क्षेत्र में पिछले सत्तर वर्ष में खुशवंत सिंह का विविध आयामी योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
साल 1947 से कुछ सालों तक खुशवंत सिंह जी ने भारत के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। साल 1980 से 1986 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.