Mahi Girlप्रिंस जैसी खुशकिस्मत नहीं रही माही। पांच साल की बच्ची का बोरवेल में गिर जाना और फिर उसकी मौत पूरे देश के लिए सदमें की बात है। कई बच्चे अब तक बोरवेल में गिर चुके हैं पर बोरवेल को खुला छोड़ देने वालों को कोई सजा नहीं। सेना के जवानों ने बच्ची को बचाने में जी जान लगा दी लेकिन वह भी लचर व्यवस्था और बोरवेल वाले की संवेदनहीनता से उस बच्ची को बचा नहीं पाए। यह महज लापरवाही नहीं बल्कि हत्या है एक मासूम की। अंधरे में एक नन्ही जान का खौफनाक संघर्ष जिसने भी देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। बच्ची का कातिल लापरवाह प्रशासन और बोरवेल मालिक है उसे सजा मिलनी चाहिए|

गुडग़ांव के पास बोरवेल में फंसी 5 साल की माही जिंदगी की जंग हार गई। उसे 86 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सेना के जवानों ने बोरवेल से बाहर निकाला। बोरवेल से निकालते ही माही को आर्मी की देख-रेख में मानेसर के ईएसआई अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके स्वास्थ्य की जांच के बाद उसकी मौत की पुष्टि की। इस खबर के बाद पूरा देश दुखी है। मगर, इस पूरे मामले में सरकारी तंत्र के एक हिस्से की लापरवाही का भी गंभीर मामला सामने आया है। खबर है कि माही जब गड्ढे के अंदर थी, तभी माही के पिता से डीजल के पैसे भी मांगे जा रहे थे। इस खबर से जहां पूरा देश स्तब्ध है, वही यह सवाल भी उठा है कि इन सबके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? क्या उन्हें सजा मिलेगी?

नहीं बच सकी माही

86 घंटे से माही जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। और पूरा देश सांसे थामे इंतजार कर रहा था। रविवार को जब 1.38 बजे माही को बोरवेल से निकाला गया, तो लोगों को उसके जिंदा होने की उम्मीदें जग गईं। लेकिन, जैसे ही माही की मौत की खबर आई, उसके परिवार के साथ-साथ पूरा देश दुखी हो गया। उसकी मां तो यह खबर सुनते बेहोश हो गई|

बॉलिवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी माही की मौत से बेहद दुखी हुए। उन्होंने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी।अमिताभ ने ट्वीट किया कि काश यह खबर गलत होती, लेकिन प्रशासन कह रहा है कि माही नहीं बची। यह बहुत दुखद और निराशाजनक है|

इसके पहले माही तक पहुंचने में रुकावट बनी चट्टान को भेदने में बचाव दल को कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार रात साढ़े 12 बजे सफलता मिली। बचाव टीम को चट्टान को भेदने में करीब 50 घंटे लगे। ऑपरेशन माही का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल अश्वनी त्यागी ने बताया कि चट्टान बहुत बड़ी बाधा थी, जिसे भेदने के लिए बचाव दल के कर्मचारी 2 दिन से कोशिश कर रहे थे। बोरवेल और इसके समानांतर खोदे गए गड्ढे के बीच यह चट्टान आ गई थी। इस सफलता के कुछ ही देर बाद माही और सेना के जवान के बीच एक छोटा पत्थर आ गया था। जवानों ने बहुत ही सावधानी से इस बाधा को भी हटा दिया और 1.38 बजे उसे बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी|

माही बुधवार रात 11 बजे खेलते-खेलते बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गई थी। तब से वह उसी गड्ढे में फंसी हुई थी। बोरवेल के बगल में दूसरा गड्ढा खोदकर माही तक पहुंचने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन शुक्रवार की रात सुरंग के रास्ते में पत्थर आने की वजह से माही तक पहुंचने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही थीं|

गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे रैपिड मेट्रो की ड्रिल मशीन से बोरवेल के गड्ढे से 12 फुट की दूरी पर ड्रिल करने का काम शुरू किया गया। गुरुवार देर रात तक रैपिड मेट्रो की ड्रिल मशीन से बोरवेल के समानांतर 4 फुट चौड़ा व 75 फुट गहरा गड्ढा खोद दिया गया। सेना के जवानों ने गुरुवार देर रात ही इस गड्ढे से बोरवेल तक पहुंचने के लिए 12 फुट लंबी सुरंग बनाने का काम शुरू कर दिया था। ड्रिल मशीन सेना के जवान को गड्ढे में नीचे पहुंचाती और सेना के जवान मैनुअल तरीके से सुरंग बनाने का काम शुरू करता। हालांकि जमीन के नीचे अधिक नमी होने के कारण 10-15 मिनट में ही जवान को परेशानी होने लगती, जिसके कारण उसे ऊपर आना पड़ता और दूसरा जवान तैयार होकर नीचे गड्ढे में जाकर सुरंग बनाने का काम शुरू कर देता। गुरुवार की पूरी रात यह सिलसिला चलता रहा|

माही के पिता से मांग रहे थे डीजल के पैसे?

माही की मौत से दुखी उसके पिता से जब मीडियाकर्मियों ने पूछा कि वह इसके लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं तो उन्होंने पुलिस और प्रशासन के ढीले-ढाले रवैये को दोष दिया। उन्होंने बताया कि माही के बोरवेल में गिरने के 5 मिनट के अंदर पुलिस को सूचना दे दी गई थी, लेकिन पुलिस डेढ़ घंटे बाद पहुंची और वह भी खाली हाथ। पुलिस टीम के पास टॉर्च भी नहीं था। उन्होंने बताया कि ड्रिलिंग के लिए जो मशीनें मंगवाई गईं वे भी एक-डेढ़ घंटे बाद बंद हो गईं। वे माही के पिता से डीजल का पैसा मांग रहे थे।उनका कहना था कि जो लोग भी इस मामले में लापरवाही के दोषी हों, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि जो कुछ उनकी बच्ची के साथ हुआ वह किसी के बच्चे के साथ न हो|

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