कर कुछ ऐसा कि कांटों के बिस्तर भी फूलों के बिछौने लगने लगे।
खुद को कर बुलंद इतना कि लोग तुझे बोने लगें।

bal kaviये कहना है बाल कवि आदित्य जैन का। प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। न हीं समय का इंतजार करती है। जिस तरह एक छोटा सा दीपक पूरे जग में उजाला कर देता है। ऐसा ही कर दिखाया है बाल कवि आदित्य जैन ने। 27 मई 1998 को कोटा राजस्थान में जन्मे इस नन्हे सूरज ने पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का उजाला बिखेर दिया। मात्र 6 बर्ष की आयु से ही लेखन तथा काव्य पाठ आरम्भ कर दिया। साथ ही देश भक्ति व समाज सेवा के कई अभियानों में बढ़ चढ़ कर योगदान किया। दुनिया का सबसे कम उम्र का कवि एवं साहित्यकार बन कर वल्र्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करा लिया। उसकी इस अनोखी प्रतिभा का प्रमाण यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने डाक्टरेट की उपाधि देकर पूरा किया। आदित्य की प्रतिभा के लिए राष्टï्रपति ,उपराष्टïपति ,राज्यपाल,मुख्यमंत्री एवं राष्टïीय सामाजिक धार्मिक साहित्यिक शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
काव्य का सफर-15 से अधिक राज्यों में 1000 से अधिक कार्यक्रम और राष्टï्रपति भवन एवं राज्य भवन में काव्य पाठ कर अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय के चुके हैं।
साथ हि 50 से अधिक टीवी चैनलों पर साक्षात्कार, कवितायों एवं वार्ताओं का प्रसाारण हो चुका है। आदित्य की कई कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं- ग्रीन भारत क्लीन भारत,वन्दे मातरम,,इस युग के तुम महावीर हो,आदी। सच में इस नन्हे प्रतिभावान बालक से आज के बच्चों को प्रेरणा मिलती हैं कि कुछ करने के लिए उम्र का मोहताज नहीं हाना चाहिए।

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