देश आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने ‘किसान विकास पत्र’ को फिर से लॉन्‍च कर दिया है। सन् 1988 में लॉन्‍च किया गया ‘किसान विकास पत्र’ साल 2011 में बंद कर दिया गया था।

साल 2011 में जब श्यामला गोपीनाथ की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस स्‍कीम को बंद किया गया था, तो किसान विकास पत्र में लगाया गया पैसे 7 साल 11 महीने में दोगुना हो जाता था। लेकिन अब इस स्‍कीम में लगाया गया पैसे 100 महीने में डबल होगा।

किसान विकास पत्र को इस बार 1000, 5000, 10000 और 50000 रुपए के निवेश पर खरीदा जा सकता है। इनमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी। इसमें किया गया निवेश सौ महीनों में दोगुना हो जाएगा। किसान विकास पत्र पर 8.7 फीसदी ब्याज मिलेगा। इसका लॉक-इन पीरियड 2.5 साल होगा।

इसके सर्टिफिकेट सिंगल या ज्वाइंट नामों से जारी किए जाएंगे। ये सर्टिफिकेट एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अनगिनत बार ट्रांसफर किए जा सकेंगे। इसके अलावा, एक पोस्ट ऑफिस से देश में कहीं भी ट्रांसफर करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा इसके साथ नॉमिनेशन का विकल्प भी होगा। इसके अलावा किसान विकास पत्र को गिरवी रख कर बैंकों से कर्ज लिया जा सकेगा।

इस बार लॉन्च किसान विकास पत्र की खासियत यह होगी कि अगर निवेशक चाहे तो इसे दो साल और छह महीने के लॉक इन पीरियड के बाद भुना सकेगा। इसके बाद इसे हर छह महीने की अवधि के बाद पूर्व निश्चित मैच्योरिटी वैल्यू पर भुनाया जा सकेगा। शुरुआत में किसान विकास पत्र बिक्री के लिए पोस्ट ऑफिसों में उपलब्ध होंगे।
Kisan

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